
गेहूं के जवारे उगाने की विधि 1. हमेशा अच्छी किस्म...

गेहूं के जवारे उगाने की विधि 1. हमेशा अच्छी किस्म के जैविक गेहूँ के बीज, अच्छी उपजाऊ (उर्वरक) मिटटी और जैविक या गोबर की उम्दा खाद का ही उपयोग करें। 2. रात को सोते समय लगभग 100 ग्राम गेहूँ एक पात्र में भिगो कर रख दें। मिटटी और खाद को अच्छी तरह मिलाकर गमलों के छेद को पत्थर या टूटे मिटटी के गमले के टुकड़े से ढक कर गमलों में मिटटी की डेढ़ दो इंच मोटी परत बिछा दें और पानी छिड़क दें। 3. पहचान के लिए सातों गमलो पर एक से सात तक नंबर डाल दें। 4. अगले दिन गेहुंओं को धो, निथारकर पहले गमले में गेहूँ को परत के रूप में बिछा दें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी से सींच दें। 5. गमले को किसी छायादार स्थान जहां पर्याप्त हवा और प्रकाश आता हो पर धूप सीधी गमलों पर न पड़े। 6. अगले दिन 2 नंबर के गमले में गेहूँ बो दीजिये और इस तरह रोज अगले नंबर के गमले में गेहूँ बोते रहें। इनमे कभी भी रासायनिक खाद या कीटनाषक न डाले। 7. शुरू में दो-तीन दिन गमलों को गीले अखबार से ढक दें और गमलों में हर रोज स्प्रे बोटल से दो बार पानी दें ताकि मिटटी में नमी बनी रहे। 8. जब गैहूँ के ज्वारे डेढ़ इंच के हो जाये तो एक बार ही पानी देना प्रयाप्त है। गर्मी के मौसम में ध्यान रखे कि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे और पानी की मात्रा भी ज्यादा न हो। 9. सात दिन बाद 5-6 पत्तियां के 7-8 इन्च लम्बे जवारे हो जाये तब इन को जड़ सहित उखाड़ कर और इनकी जड़े काट कर पानी से अच्छी तरह धो कर पीस ले और रस निकाल ले व इसका सेवन करे। 10. जवारों के बचे हुए गुदे को आप त्वचा रोग पर मल सकते हैं। 11. नियमित रूप से जवारें लेने के लिए जैसे-जैसे गमले खाली होते जाये खाद मिटटी बदल कर नए बीज उगाते जाएँ। 12. जब तक जवारे चाहिए तब तक इस प्रक्रिया को निरंतर दोहराते रहे। इस तरह जवारा घर में पूरे साल भर उगाया जा सकता है।
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