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BEST ASTROLOGER AND JYOTISH IN MUMBAI AHMEDABAD SURAT BARODA VADODARA INDORE BHOPAL JAMNAGAR RAJKOT GOA PUNE : मंगल के योग बदलते हैं जीवन की दशा मंगल के शुभ और अशुभ योग कुंडली में मंगल की अच्छी दशा बेहद कामयाब बनाती है. वहीं इस ग्रह की बुरी दशा इंसान से सब कुछ छीन भी सकती है. मंगल के बहुत से शुभ और अशुभ योग हैं. मंगल का पहला अशुभ योग - - किसी कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो अंगारक योग बनता है. - अक्सर यह योग बड़ी दुर्घटना का कारण बनता है. - इसके चलते लोगों को सर्जरी और रक्त से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. - अंगारक योग इंसान का स्वभाव बहुत क्रूर और नकारात्मक बना देता है. - इस योग की वजह से परिवार के साथ रिश्ते बिगड़ने लगते हैं. मंगल का दूसरा अशुभ योग - अंगारक योग के बाद मंगल का दूसरा अशुभ योग है मंगल दोष. यह इंसान के व्यक्तित्व और रिश्तों को नाजुक बना देता है. - कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें स्थान में मंगल हो तो मंगलदोष का योग बनता है. - इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को मांगलिक कहते हैं. - कुंडली की यह स्थिति विवाह संबंधों के लिए बहुत संवेदनशील मानी जाती है. मंगल का तीसरा अशुभ योग - नीचस्थ मंगल तीसरा सबसे अशुभ योग है. जिनकी कुंडली में यह योग बनता है, उन्हें अजीब परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. - इस योग में कर्क राशि में मंगल नीच का यानी कमजोर हो जाता है. - जिनकी कुंडली में नीचस्थ मंगल योग होता है, उनमें आत्मविश्वास और साहस की कमी होती है. - यह योग खून की कमी का भी कारण बनता है. - कभी–कभी कर्क राशि का नीचस्थ मंगल इंसान को डॉक्टर या सर्जन भी बना देता है. नीचस्थ मंगल के लिए उपाय - मंगल का चौथा अशुभ योग - मंगल का एक और अशुभ योग है जो बहुत खतरनाक है. इसे शनि मंगल (अग्नि योग) कहा जाता है. इसके कारण इंसान की जिंदगी में बड़ी और जानलेवा घटनाओं का योग बनता है. - ज्योतिष में शनि को हवा और मंगल को आग माना जाता है. - जिनकी कुंडली में शनि मंगल (अग्नि योग) होता है उन्हें हथियार, हवाई हादसों और बड़ी दुर्घटनाओं से सावधान रहना चाहिए. - हालांकि यह योग कभी–कभी बड़ी कामयाबी भी दिलाता है. मंगल का पहला शुभ योग - मंगल के शुभ योग में भाग्य चमक उठता है. लक्ष्मी योग मंगल का पहला शुभ योग है. - चंद्रमा और मंगल के संयोग से लक्ष्मी योग बनता है. - यह योग इंसान को धनवान बनाता है. - जिनकी कुंडली में लक्ष्मी योग है, उन्हें नियमित दान करना चाहिए. मंगल का दूसरा शुभ योग - - मंगल से बनने वाले पंच-महापुरुष योग को रूचक योग कहते हैं. - जब मंगल मजबूत स्थिति के साथ मेष, वृश्चिक या मकर राशि में हो तो रूचक योग बनता है. - यह योग इंसान को राजा, भू-स्वामी, सेनाध्यक्ष और प्रशासक जैसे बड़े पद दिलाता है. - इस योग वाले व्यक्ति को कमजोर और गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए । [21/06 9:37 pm] +91 79059 35097: *☄बच्चे का जन्म किस पाये में..* ---+---+---+---+---+---+---+---+---+--- 🌺 किसी परिवार में बच्चे का जन्म होना परिवार में वंश वृद्धि का परिचायक है l 🔅बच्चे के जन्म के साथ ही बच्चे की स्वस्थता जानने के उपरांत सबसे पहले सबका यही प्रश्न होता है कि *बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है ?* शास्त्रों में मुख्य रूप से चार पायों का वर्णन है :- *1. चांदी का पाया 2. ताँबे का पाया* *3. सोने का पाया 4. लोहे का पाया* 🔅हर पाये में जन्मे बालक का शुभाशुभ फल भिन्न होता है l बालक/बालिका का जन्म किस पाये में हुआ है ये निम्न विधि से आसानी से जाना जा सकता है l जन्म पत्रिका में, लग्न से जातक का चन्द्रमा किस भाव में है ये देखा जाता है.. *☄जन्म लग्न से जातक का चन्द्रमा, यदि पहले, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म "सोने के पाये" में हुआ है l* *☄यदि जातक का जन्म चंद्र लग्न से भाव.. दो, पांच या नौवें में है तो बच्चे का जन्म चाँदी के पाये में हुआ है l* *☄जन्म लग्न से ज.चन्द्रमा यदि "तीसरे, सातवें या दसवें भाव" में हो तो बच्चे का जन्म "ताम्बे के पाये" में हुआ है l* *☄जन्म लग्न से जातक का चन्द्रमा यदि चौथे, आठवें या बारहवें भाव में.. "मोक्ष-∆" में हो तो बच्चे का जन्म लोहे के पाये में हुआ है l* 🌺 इस तरीके से कुंडली में देखकर आसानी से बताया जा सकता है की बच्चे का जन्म किस पाये में हुआ है l अब प्रश्न है कि... 💥 *किस पाये का क्याँ फल होता है ❓* ~~~~~~~~>><<~~~~~~~~ *🔺"चाँदी के पाये" में अगर बच्चेका जन्म हुआ है तो *बच्चा परिवार में सुख समृद्धि लेकर आता है l बच्चा सुखों में पलता है l परिवार का मान सम्मान में वृद्धि होती है l माता पिता की तरक्की होती है l* 🔺अगर बच्चा *"सोने के पाये" में पैदा हुआ है तो, बालक "चिंता-दायक" ज्यादा शुभ नहीं है l ऐसा "बच्चा रोगी" होता है तथा "बचपन में ही इस बच्चे की स्वास्थ समस्या, दवाईयाँ शुरू हो जाती हैं l "परिवार की शुखशान्ति भंग होती है l"* जातक के *पिता को, शत्रुओं का सामना करना पड़ता है और धन की हानि* भी हो सकती है l 🔅 *इसकी शांति के लिए बच्चे के वजन के बराबर गेंहू का दान करना चाहिए l* अगर *संपन्न हो तो सोने का दान भी किया जा सकता है l* *🔺ताम्बे के पाये* में उत्पन्न बच्चा, *"पिता के व्यापार में वृद्धि, "लक्ष्मि- पति" बनाता है और परिवार में सुख-समृद्धि लेकर आता है l* *🔺लोहे के पाये* में पैदा हुआ बच्चा परिवार के लिए *"भारी कष्टदायक" होता है l बच्चा कुछ़ रोगी रहता है l पिता के लिए बच्चा विशेषतया भारी होता है l परिवार में कोई शोकप्रद घटना भी होती है l* 🔅इस लिए, यदी किसि जातक का लोहे के पाये में जन्म हो तो माता-पिताको, परिवारजन सह, बच्चे के बचपनमें ही शास्त्रानुसार अावश्यक उचित ... *"ग्रह-शांति" करवानी चाहिए l* *-हरिः ओउःम्🔔
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