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‬: कुंडली का यह योग व्यक्ति को बना देता है राजा कु...

2017-07-19T12:44:08
Shiv Shakti Jyotish
‬: कुंडली का यह योग व्यक्ति को बना देता है राजाकु...

‬: कुंडली का यह योग व्यक्ति को बना देता है राजा कुंडली में नौवें और दसवें स्थान का बड़ा महत्त्व होता है।जन्म कुंडली में नौवां स्थान भाग्य का और दसवां कर्म का स्थान होता है। कोई भी व्यक्ति इन दोनों घरों की वजह से ही सबसे ज्यादा सुख और समृधि प्राप्त करता है। कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है और अच्छा भाग्य, अच्छे कार्य व्यक्ति से करवाता है।अगर जन्म कुंडली के नौवें या दसवें घर में सही ग्रह मौजूद रहते हैं तो उन परिस्थितियों में राजयोग का निर्माण होता है। राज योग एक ऐसा योग होता है जो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष राजा के समान सुख प्रदान करता है। इस योग को प्राप्त करने वाला व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने वाला होता है। ज्योतिष की दुनिया में जिन व्यक्तियों की कुण्डली में राजयोग निर्मित होता है, वे उच्च स्तरीय राजनेता, मंत्री, किसी राजनीतिक दल के प्रमुखया कला और व्यवसाय में खूब मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।राजयोग का आंकलन करने के लिए जन्म कुंडली में लग्न को आधार बनाया जाता है। कुंडली की लग्न में सही ग्रह मौजूद होते हैं तो राजयोग का निर्माण होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग रहता है उस व्यक्ति को हर प्रकार की सुख-सुविधा और लाभ भी प्राप्त होते हैं। इस लेख के माघ्यम से आइए जानें कि कुण्डली में राजयोग का निर्माण कैसे होता है- मेष लग्न- मेष लग्न में मंगल और ब्रहस्पति अगर कुंडली के नौवें या दसवें भाव में विराजमान होते हैं तो यह राजयोग कारक बन जाता है। वृष लग्न- वृष लग्न में शुक्र और शनि अगर नौवें या दसवें स्थान पर विराजमान होते हैं तो यह राजयोग का निर्माण कर देते हैं।इस लग्न में शनि राजयोग के लिए अहम कारक बताया जाता है। मिथुन लग्न- मिथुन लग्न में अगर बुध या शनि कुंडली के नौवें या दसवें घर में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक का जीवन राजाओं जैसा बन जाता है। कर्क लग्न- कर्क लग्न में अगर चंद्रमा और ब्रहस्पति भाग्य या कर्म के स्थान पर मौजूद होते हैं तो यह केंद्र त्रिकोंण राज योग बना देते हैं। इस लग्न वालों के लिए ब्रहस्पति और चन्द्रमा बेहद शुभ ग्रह भी बताये जाते हैं। सिंह लग्न- सिंह लग्न के जातकों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल दसमं या भाग्य स्थान में बैठ जाते हैं तो जातक के जीवन में राज योग कारक का निर्माण हो जाता है। कन्या लग्न- कन्या लग्न में बुध और शुक्र अगर भाग्य स्थान या दसमं भाव में एक साथ आ जाते हैं तो जीवन राजाओं जैसा हो जाता है। तुला लग्न- तुला लग्न वालों का भी शुक्र या बुध अगर कुंडली के नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाता है तो इस ग्रहों का शुभ असर जातक को राजयोग के रूप में प्राप्त होने लगता है। वृश्चिक लग्न- वृश्चिक लग्न में सूर्य और मंगल, भाग्य स्थान या कर्म स्थान (नौवें या दसवें) भाव में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले का जीवन राजाओं जैसा हो जाता है। यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है कि अगर मंगल और चंद्रमा भी भाग्य या कर्म स्थान पर आ जायें तो यह शुभ रहता है। धनु लग्न- धनु लग्न के जातकों की कुंडली में राजयोग के कारक, ब्रहस्पति और सूर्य माने जाते हैं। यह दोनों ग्रह अगरनौवें या दसवें घर में एक साथ बैठ जायें तो यह राजयोग कारक बन जाता है। मकर लग्न- मकर लग्न वाली की कुंडली में अगर शनि और बुध की युति, भाग्य या कर्म स्थान पर मौजूद होती है तो राजयोग बन जाता है। कुंभ लग्न- कुंभ लग्न वालों का अगर शुक्र और शनि नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ आ जाते हैं तो जीवन राजाओं जैसा हो जाता है। मीन लग्न- मीन लग्न वालों का अगर ब्रहस्पति और मंगल जन्म कुंडली के नवें या दसमं स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाते हैं तो यह राज योग बना देते हैं। . ASTROLOGY & SUN TRANSIT EFFECT ON LEO ASCENDANT PEOPLE . Sun planet will be in Moon sign from 16 July 2017 to 16 August 2017 . Rahu is already in Leo sign . Saturn is already in Scorpio sign . . This period can be tough for Leo ascendant people . They can have accident, drive carefully . They can go far from birth place . Mother can have health problem . Be careful if you are doing property related transaction . Check all documents . Chances of disturbance in property matters . Chances of misunderstanding/fights in couple . Those who are engaged . Stay alert, chances of cancellation of relationship . . After 15 August please give feedback That Which problem you have faced in this month . ==================== . . ================ . . राशी फल अर्थात ग्रह गोचर का जातक पर प्रभाव . जन्म कुण्डली में ग्रह स्थिर होते हैं . जब जातक का जन्म होता है . उस समय ग्रहों की जो स्थिति होती है उसे जन्म कुण्डली कहते हैं . गोचर में ग्रह घूमते रहते हैं . जो जातक के जीवन पर प्रभाव डालते हैं . . वर्तमान समय कैसा है . यह कई तथ्यों पर निर्भर करता है . 1 जन्म कुण्डली में स्थित ग्रह . 2 महादशा + अन्तर्दशा , वर्ष फल . 3 घर का वास्तु . 4 गोचर में ग्रह स्थिति . 5 जातक के कर्म . 6 जातक द्वारा किये गए उपाय . और भी कई तथ्य हो सकते हैं . . अब यदि गोचर में ग्रहों की जो स्थिति है . अगर वही जन्म कुण्डली में है तो . जातक के साथ वह घटना होने की सम्भावना बन जाएगी . यदि शेष 4 तथ्य भी मिल जाते हैं तो घटना हो जाती है . अब बात करते हैं राशि फल की जो केवल ग्रह गोचर पर आधारित होता है . अब एक ही लगन के लाखों लोग होते हैं . सबके साथ वह घटना नहीं होगी . जिन जातकों की जन्म कुण्डली में अधीक तथ्य मिलेंगे . केवल उन्ही के साथ होंगी . इसलिए राशी फल पूरी तरह लागु अर्थात सही नहीं होता . . फिर भी अगर आपकी राशी फल में लिखा है कि . दुर्घटना होने की सम्भावना है तो आपको सम्भल जाना चाहीये . सही तरह से लिखा हुआ राशी फल एक " सुचना" की तरह हैं . जो ध्यान में रखनी चाहिए . . मान लीजिये सड़क पर board लगा है कि . आगे रास्ता ख़राब है . तो इसका मतलब यह नहीं कि सबका accident हो जायेगा . इसका मतलब यह है कि यदि आप लापरवाही करते हैं तो accident हो सकता है . . राशी फल अर्थात गृह गोचर का प्रभाव जातक पर कैसे पड़ेगा . लगन राशि से या चन्द्र राशि से . इसके बारे में भी सबके अलग विचार हैं . मेरे जो लेख होते हैं वह लगन राशि पर होते हैं . कुछ लोग नाम राशी से भी देखते हैं . वह तो पूरी तरह से गलत है . क्यूंकि कोई भी नाम जन्म कुण्डली के अनुसार नहीं रखता . . जब भी राशी फल अर्थात ग्रह गोचर के प्रभाव की बात आती है . तो लोग कहते हैं . राम और रावण की राशि एक ही थी . आशा है अब आपका संशय(confusion) दूर हो गया होगा . यदि फिर भी कोई प्रश्न है तो आप पूछ सकते हैं . यदि आप इस लेख को WHATSAPP पर प्राप्त करना चाहते हैं . तो अपना नाम MOBILE NUMBER ARTICLE NUMBER लिख कर INBOX करें . . ====================== *जीवन में सुख और सफलता के उपाय* . कहते हैं कि पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इनके पालन से जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति निश्चित रूप से होती है। . – घर का हर व्यक्ति सूर्योदय के पहले उठे और उगते सूर्य के दर्शन करे। इसी समय जोर से गायत्री मंत्र का उच्चारण करे तो घर के वास्तु दोष भी नष्ट हो जाते है। . – सूर्य दर्शन के बाद सूर्य को जल, पुष्प और रोली-अक्षत का अर्घ्य दे, सूर्य के साथ त्राटक करे। . – बिस्तर से उठते समय दोनों पैर जमीन पर एक साथ रखे, उसी समय इष्ट का स्मरण करे और हाथों को मुख पर फेरे। . – स्नान और पूजन सुबह 7 से 8 बजे के बीच अवश्य कर ले। . – घर में तुलसी और आक का पौधा लगाए और उनकी नियमित सेवा करे। . – पक्षियों को दाना डाले। . – शनिवार और अमावस्या को सारे घर की सफाई करें, कबाड़ बाहर निकले और जूते-चप्पलों का दान कर दे। . – स्नान करने के बाद स्नानघर को कभी गंदा न छोड़े। . – जितना हो सके भांजी और भतीजी को कोई न कोई उपहार देते रहे। किसी बुधवार को बुआ को भी चाट या चटपटी वस्तु खिलाएँ। . – घर में भोजन बनते समय गाय और कुत्ते का हिस्सा अवश्य निकाले। . – बुधवार को किसी को भी उधार न दे, वापस नहीं आएगा। . – राहू काल में कोई कार्य शुरू न करें। . – श्री सूक्त का पाठ करने से धन आता रहेगा। . – वर्ष में एक या दो बार घर में किसी पाठ या मंत्रोक्त पूजन को ब्राह्मण द्वारा जरूर कराए। . – स्फटिक का श्रीयंत्र, पारद शिवलिंग, श्वेतार्क गणपति और दक्षिणावर्त शंख को घर या दुकान आदि में स्थापित कर पूजन करने से घर का भण्डार भरा-पूरा रहता है। . – घर के हर सदस्य को अपने-अपने इष्ट का जाप व पूजन अवश्य करना चाहिए। . – जहाँ तक हो सके अन्न, वस्त्र, तेल, कंबल, अध्ययन सामग्री आदि का दान करें। दान करने के बाद उसका उल्लेख न करें। . – अपने राशि या लग्न स्वामी ग्रह के रंग की कोई वस्तु अपने साथ हमेशा रखे।।

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