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ज्योतिष में केतु और जातक ================== केतु अ...

2017-09-12T17:03:05
Shiv Shakti Jyotish
ज्योतिष में केतु और जातक==================केतु अ...

ज्योतिष में केतु और जातक ================== केतु अलगाव है, ध्यान है, साधना है, तर्क शक्ति है, आभास शक्ति है, चरित्र है, एक मशाल है जिस से सब कुछ रोशन होता है जैसे घर का बिजली का मीटर और सविच बोरड | वास्तु में इसकी दिशा अग्नि कोण ( दक्षिण-पुर्व ) है | कुण्डली के जिस भाव में केतु होता है जातक उसी से सम्बन्धित आलोचना करता है क्युकि उसी भाव की चीज़ो में सुख की कमी रहती है | जैसे अगर केतु किसी के पहले भाव में हो तो जातक शारिरिक सुख सुविधायो की ही आलोचना करेगा कि मुझे खाना समय से नहीं मिल रहा या मन मुताबिक खाने को नहीं मिल रहा या फ़िर किसी ना किसी रूप में शरिरिक सुख में कमी रहती है | ऐसे ही अगर केतु दुसरे भाव में हो तो जातक अपने पारिवारिक महोल से ही खुश नहीं रहता, अपने परिवार के सदस्यो की ही आलोचना करता रहता है और साथ ही धन के मामले में भी संतुष्ट नहीं रहता | इसी तरह अगर केतु तीसरे भाव में हो तो जातक अपने सहकर्मीयो से ही खुश नहीं रहता, किसी ना किसी वझा से साथ काम करने वालो से उसका मन मुटाव होता ही रहता है और साथ ही भाई बहनो से भी सुख की कमी रहती है | इसी तरह यदी केतु चोथे भाव में हो तो जातक को वाहनो के सुख, घर के सुख और माता के सुख में दिक्कतो का सामना करना पडता है | इसी तरह यदी केतु पंचम भाव में हो तो जातक के लिये खुद के द्वारा लिये फ़ैसले ही हितकारी नहीं रहते और साथ ही सन्तान सुख में भी बाधाये बनी रहती हैं संतान हो जाये तो सम्बन्ध मधुर नहीं रहते | इसी तरह यदि केतु छठे भाव में हो तो जातक धन के लेन देन के मामलो की वझा से दिक्कतो का सामना करता है, धन उधार लेने पर जातक को मुसीबतो का सामना करना पडता है और साथ ही बिना वझा की टैन्शन की वझा से जातक की सेहत भी प्रभावित रहती है | यदी केतु सातवे भाव में हो तो जातक के दोस्त ही समय पर उसके काम नहीं आते, जातक का दूसरो पर निरभर रहना ही उसके लिये दिक्कते खडी करता रहता है | इसी तरह यदी केतु आठवे भाव में हो तो जातक को शारिरिक सुखो में कमी रहती है, दोस्तो से धोखे मिलते है, दोस्तों की वझा से धन का नुकसान होता है, बेवझा की बिमारिया जातक को घेरे रखती हैं | यदि केतु नोवे भाव में हो तो जातक को तंत्र- मंत्र, जादु- टोटके जैसी क्रियायो या फ़िर ऐकान्त में रहने की आदत होती है और गुप्त कार्यो में जातक की रुचि रहती है |यदि केतु दसवे भाव में हो तो जातक को कार्य करने की शक्ति में कमी, कार्य में बाधाये, कान्फ़िडेन्स में कमी और अक्सर सामाजिक स्थिति के लिये झूझना पडता है | यदि केतु एकादश भाव में हो तो जातक को पैसा बचाने मे दिक्कतो का सामना करना पडता है, धन बेवझा के खर्चो में नष्ट हो जाता है और बचपन भी कुछ खास नही गुज़रता, शुरुआती जीवन में दिक्कतो का सामना करना पडता है | यदि केतु बारवे भाव मे हो तो जातक का धन सुख साधनो में नष्ट होता है, बचत करने में दिक्कतो का सामना करना पडता है, पिता के सुख में भी कमी करता है, पिता के द्वारा दी गैई वस्तु लाभ नहीं देती, जैसे पिता के द्वारा दिया गया धन जल्दी नष्ट हो जाता है, पिता के द्वारा चलाया गया कार्य लाभ नहीं देता |

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