
कुंडली में बुधादित्य योग का भाव अनुसार शुभ अशुभ फल...
कुंडली में बुधादित्य योग का भाव अनुसार शुभ अशुभ फल ज्योतिष में सैकड़ों शुभाशुभ योग हैं। इनमें से एक योग बुध-आदित्य योग है। जब कुण्डली में सूर्य-बुध की युति कहीं भी हो तो यह योग होता है। यह योग अधिकांश कुंडलियों में पाया जाता है। बुध ही एक ऐसा ग्रह है जिसका प्रभाव सूर्य के साथ क्षीण नहीं होता है। यह अवश्य ध्यान रखें कि बुध 13अंश से कम ने हो। बुध-आदित्य योग का सामान्य फल इस प्रकार है-जातक बुद्धिमान, प्रत्येक कठिनाईयों, समस्याओं को चतुराई से हल करने में समर्थ होता है। अपने कार्यक्षेत्र में विख्यात होता है। प्रायः सुखमय जीवन व्यतीत करता है। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। फल में राशि व अन्य ग्रह-सम्बन्ध से भी अन्तर आता है। लेकिन प्रायः उक्त फल देखने को मिलता है। इस योग के कारक ग्रह सूर्य व बुध हैं। इसका फल इन ग्रहों की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा में मिलता है। प्रायः शास्त्रों में यही फल मिलता है। किन्तु अनुभव के आधार पर, इस योग का फल द्वादश भावों में विशिष्ट होता है जोकि इस प्रकार है- बुध-आदित्य योग प्रथम भाव में हो तो जातक का कद माता-पिता के बीच का होता है। लग्न में वृष, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु या कुम्भ राशि हो तो कद लम्बा होता है। जातक भूरे बाल वाला, कठोर, साहसी, कुशाग्र बुद्धि, आत्मसम्मानी एवं क्षमाशील होता है। स्त्री जातक में चिड़चिड़ापन होता है। बचपन में आंख, कान, नाक व गले के रोग से कष्ट होता है। बुध-आदित्य योग दूसरे भाव में हो तोजातक की अभिव्यक्ति तार्किक, श्रेष्ठता मनोग्रन्थि का रोगी, इंजीनीयर, घूसखोर एवं ऋण लेकर व्यवसाय करने वाला होता है। बुध-आदित्य योग तीसरे भाव में हो तो जातक परिश्रमी, भाई-बहिनों में आत्मीयता न रखने वाला, मौसी के लिए कष्टकारी, भाग्योदय के अनेक अवसर खो देता है एवं परिवार की खुशहाली में बाधक होता है। तीसरे भाव में इस योग का फल सामान्य ही होता है। बुध-आदित्य योग चौथे भाव में हो तो जातक को आशातीत सफलता दिलाता है। माता का स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है। पत्नी के भाग्य का सहारा मिलता है। निज सम्पत्ति होते हुए भी दूसरों की या सरकारी भवन व वाहन का उपयोग करने वाला। तार्किक बुद्धि, संस्था प्रधान, इंजीनियर, कुलपति, न्यायाधीश या नेता होता है। चतुर्थ या लग्न भाव पाप प्रभावित हो तो उच्च कोटि का अपराधी भी बन सकता है। बुध-आदित्य योग पांचवे भाव में हो तो जातक प्रतिभावान, बड़ी बहिन या भाभी से वैचारिक मतभेद होते हैं, चित्त उद्विग्न, वात रोगी, यकृत विकार होता है। मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन राशि में हो तो अल्प संतति होती है। बुध-आदित्य योग छठे भाव में हो तो जातक को शत्रु चिन्ता रहती है, लेकिन आत्मविश्वास बना रहता है। बचपन में मामा पक्ष से लाभ। आवश्यकता पड़ने पर सहयोग प्राप्त नहीं होता है। बुध-आदित्य योग सातवें भाव में हो तो जातक कामुक, यौन रोग से पीड़ित, जीवन साथी की उपेक्षा कर दूसरों के प्रति आकृष्ट होता है। यदि मेष या सिंह राशि में बने तो एकनिष्ठ होता है। अधिकांशतः चिकित्सक व अभिनेताओं की कुंडलियों में यह योग पाया जाता है। बुध-आदित्य योग आठवें भाव में हो तो यह योग अशुभफलदायक होता है। दूसरों को सहायता व सहयोग देने के चक्कर में स्वयं उलझ जाते हैं। दुर्घटना का भय बना रहता है। किडनी स्टोन, आमाशय में जलन, आंतों में विकृति की संभावना रहती है। बुध-आदित्य योग नौवें भाव में हो तो जातक स्वाभिमानी, अहंकारी, पैतृक सम्पत्ति का त्याग करने वाला, शिव शक्ति का उपासक एवं स्वअर्जित सम्पत्ति का सुख भोगता है। बुध-आदित्य योग दसवें भाव में हो तो जातक बुद्धिमान, साहसी, संगीत प्रेमी, धन कमाने में निपुण, धार्मिक स्थानों का निर्माण करने वाला एवं ख्याति प्राप्त करता है। बुध-आदित्य योग ग्यारहवें भाव में हो तो जातक यशस्वी, ज्ञानी, रूपवान, संगीत प्रेमी और धन-धान्य से सम्पन्न होता है। जातक लोक सेवा में तत्पर रहता है। बुध-आदित्य योग बारहवें भाव में हो तो बारहवें भाव में अशुभ फल देता है। जुआ, शेयर, सट्टा, अचानक धनलाभ के चक्कर में फंसकर अपना सर्वस्व लुटा बैठता है। चाचा व ताऊ से विरोध तथा अपनी सम्पत्ति उनके चंगुल में फंस जाती है। : बुध ग्रह का प्रभाव प्रथम भाव प्रथम भाव में बुध होने पर जातक दूसरों का प्रिय, ज्ञानवान, चिंतक, त्यागी, लेखक अथवा प्रकाषक, गणितज्ञ, कवि, चिकित्सक, ज्ञान पिपासु तथा अपने धर्म पर मनन करने वाला होता है वह गंभीर व्यक्तित्व वाला, चरित्रवान, मधुरभाषी तथा संयमी होता है। उसमें किसी एक विषय में पारंगत होने तथा दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता होती है। वह वाक्पटु और दूसरों को सहज ही मोहने वाला होता है। आयु के 10 वर्ष से ही प्रभावपूर्ण दिखने लगता है। द्वितीय भाव द्वितीय भाव का बुध जातक को सुवक्ता, धनी, सलाहकार, बिचैलिया, लेखक व प्रकाषन से आय करने वाला बनाता है। वह अपने प्रयास से अत्यधिक धन कमाने वाला, यात्रा प्रेमी, पाप से दूर रहने वाला, पवित्र तथा ज्ञान पिपासु होता है। वह जीवन में अच्छी वस्तुओं का शौकीन, परिवार का प्रिय तथा अपने कौषल विषेष रूप से वाणी द्वारा धन कमाने वाला होता है। आयु के 26वें वर्ष में धन की हानि तथा 36वें वर्ष में आकस्मिक धन लाभ। तृतीय भाव तृतीय भाव का बुध जातक को साहसी, सुविधा में रूचि, समाज का सहायक, व्यवसाय से धन कमाने वाला तथा शीघ्र मैत्री करने वाला बनाता है। रिष्तेदारों से लाभ लेने वाला, ज्योतिष, अध्यात्म आदि रहस्यमय विषयों में गहरी रुचि रखने वाला, खुषियां चाहने वाला परन्तु स्वार्थी नहीं। संयमी, दयालु, सभ्य, निरंतर यात्रा करने वाला तथा अच्छी वस्तुओं का संग्रह करने वाला होता है। आयु के 12वें वर्ष में भाग्य लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। चतुर्थ भाव चतुर्थ भाव का बुध जातक को पैदाइषी परिवर्तनषील बनाता है। चंचल, संपत्तिवान, बुद्धिमान, रिष्तेदारों से रहित, विपरीत लिंग वालों का प्रिय तथा बेषर्म बनाता है। अचल सम्पत्तियों से लाभ व आय प्राप्त करने वाला, अच्छे वाहन वाला, संगीत का प्रेमी, गायन में रुचि रखने वाला तथा अच्छी स्मरण शक्ति वाला बनाता है। आयु का 22वां वर्ष विषेष लाभकारी होता है। पंचम भाव पंचम भाव का बुध जातक को जन्मजात संगीत का ज्ञाता बनाता है। जीवन साथी से प्रेम पाने वाला, बुद्धिमान, संतान युक्त बनाता है। बड़ों और ज्ञानी जनों का आदर करने वाला, भक्ति तथा रहस्यवाद में गहरी रुचि वाला होता है। वह धनवान होता है। राजा का प्रिय, सलाहकार तथा अपनी बुद्धिमत्ता से लोगों को चमत्कृत करने वाला होता है परंतु बुध के पीड़ित होने पर वह सभी अच्छे गुणों से रहित तथा बुरी आदतों की ओर उन्मुख हो जाता है तथा जुए आदि का आदी हो सकता है। सामान्यतया वाद-विवाद में कुषल तथा सृजनात्मक गतिविधियों वाला होता है। आयु के 26वें वर्ष में माता के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। षष्ठम् भाव षष्ठम् भाव में बुध जातक को आत्मसंयमी, अति बुद्धिमान तथा मातृभक्त बनाता है। वह संबंधियों से विरोध, आलसी, क्रूर प्रकृति का, चिन्ताग्रस्त तथा नौकरों अथवा सेवकों द्वारा कष्ट पाने वाला होता है। वह लेख अथवा प्रकाषन द्वारा आय करता है। औषधियों में रुचि, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक तथा भोजन के विषय में अच्छा ज्ञान रखता है। आयु के तीसरे वर्ष में शारीरिक कष्ट तथा 36वें वर्ष में शत्रु भय होता है। सप्तम भाव सप्तम् भाव का बुध जातक को ज्ञानवान बनाता है। उसका भाग्य विवाह के बाद उदित होता है, ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से हंसमुख होता है और बच्चों के साथ विषेष संबंध स्थापित करता है जहां बच्चे भी खुलकर अपने मन की बात उस व्यक्ति से कर सकते हैं। विपरीत सेक्स के प्रति एक स्वाभाविक सा आकर्षण होता है और विपरीत लिंग के व्यक्ति भी उसे पसंद करते हैं। ऐसा व्यक्ति बहुत अच्छा होता है, साधारणतया सत्यता का पालन करता है और व्यापार में उसकी बुद्धि प्रखर होती है जिसके फलस्वरुप वह अपने व्यक्तित्व और बुद्धि से लोगों को प्रभावित कर आसानी से धन कमा सकता है। ऐसा व्यक्ति अच्छा लेखक होता है और उसके भाग्यवर्धक वर्ष होते हैं 17 या 22। अष्टम भाव अष्टम् भाव का बुध, जातक को कोमल स्वभाव, अच्छा मेजबान, धनी, सरकार से अच्छा पद अथवा अधिकारिक स्थान प्रदान करता है। वह सहजता से धन कमाने वाला, सदा सकारात्मक सोच वाला, नेकचलन, षत्रुओं पर विजयी तथा विदेष में मान पाने वाला होता है। आयु के 14वें वर्ष में स्वास्थ्य कुछ नरम हो सकता है। नवम भाव नवम् भाव का बुध जातक को ज्ञानवान, धनी, कुषल कलाकार, धार्मिक, समर्पित पत्नी तथा बुद्धिमान संतान प्रदान करता है। वह सात्विक आय करने वाला, साधु-संतों का मान करने वाला तथा निरंतर विदेष यात्राएं करने वाला होता है। वह दयावान, सभ्य, बहुत-से सेवको वाला तथा अपने कुल और परिवार का नाम ऊंचा करने वाला होता है। आयु के 19वें वर्ष में माता को कष्ट तथा 32वें वर्ष में भाग्य की हानि हो सकती है। दषम भाव दषम् भाव का बुध जातक को ज्ञानवान, शास्त्रों का ज्ञाता, प्रसिद्ध तथा सात्विक मार्ग से जीवन में उन्नति करने वाला बनाता है। रिष्तेदारों से प्रेम रखने वाला तथा उनकी सहायता करने वाला, तीक्ष्ण बु़िद्ध का स्वामी, निपुण, विनोदी, कुषल वक्ता तथा जीवन में विभिन्न उपक्रम करने में कुषल होता है। दलाली से अच्छी आय वाला किंतु कमजोर बुध विपरीत परिणाम देता है। आयु के 16वें अथवा 29वें वर्ष में निष्चय ही धन लाभ प्राप्त करता है। एकादष भाव एकादष भाव का बुध जातक को कलाओं में रुचि लेने वाला, ज्योतिष तथा मस्तिष्क विज्ञान में रुचि रखने वाला बनाता है। वह एक कुषल लेखक, शासन से लाभ पाने वाला, गुप्त विद्याओं में गहरी रुचि रखने वाला तथा संगीत कला का अच्छा ज्ञाता भी होता है। वह अति बुद्धिमान, अच्छा जीवन साथी तथा परिवार का सम्मान बढ़ाने वाला होता है। जीवन के 45वें वर्ष में वह विषेष लाभ अर्जित करता है। द्वादष भाव द्वादष भाव का बुध जातक को समाज में अपमान का भागी तथा अनुत्पादक कार्यों में लिप्त करता है। कमजोर बुध मानसिक कष्ट देता है तथा वह दूसरों के प्रभाव में सहज ही आ जाता है और दुख पाता है किंतु उच्च का बुध अध्यात्म, गुप्त विद्याओं में रुचि तथा अत्यधिक सम्मान प्रदान करता है। जीवन का 22वां तथा 44वां वर्ष दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है। विभिन्न राषियों में बुध का परिणाम मेष मेष राषि में बुध व्यक्ति को दुर्जन का मित्र तथा जीवन में कमी तथा उदासीनता का वातावरण प्रदान करता है। वह शराब व अन्य नषों का प्रेमी तथा अपने दुव्र्यवहार द्वारा बदनामी कमाने वाला हो सकता है। आर्थिक कष्ट व तनाव समय-समय पर होते रहते हैं जिनके चलते वह कभी-कभी अतिसंवेदनषील हो जाता है। वृष वृष राषि में बुध जातक को अपव्ययी तथा बड़े-बुजुर्गों के पद चिह्नों पर न चलने वाला बनाता है। वह जीवन में विभिन्न कष्टों से गुजरता है तथा उनके कारण पष्चाताप करता है। आर्थिक हानि तथा संतान की चिंता सदा लगी रहती है। मिथुन मिथुन राषि में बुध जातक की माता को मानसिक कष्ट देता है। उसके विचारों का दूसरों द्वारा विरोध होता है। परन्तु जीवन साथी व संतान से प्रसन्नता प्राप्त होती है। वह अपने कार्य में कुषल, बहुत बुद्धिमान तथा अपनी वाणी व लेखन से लोगों को प्रभावित करने वाला होता है। कर्क कर्क राषि का बुध जातक को विदेष का वासी तथा कभी-कभी बिना ईच्छा वाले स्थान पर भी रहना पड़ सकता है। उसे जीवन में विभिन्न प्रकार के दुख व चिंताओं का सामना करना पड़ता है। वह कविता व लेखन में रुचि रखने वाला तथा यदि इसे ही व्यवसाय बनाए तो नाम, धन व यष कमाने वाला होता है तथा उसके अनेक मित्र होते हैं। सिंह सिंह राषि में बुध जातक को पुत्र व जीवन साथी से कष्ट देता है। कभी-कभी गलत विचारों से प्रेरित हो जाता है और अपने लक्ष्यों को पाने में उसे बहुत कठिनाई होती है। इन सबसे बढ़कर वह साहसी, हिम्मती, प्रयत्नषील, कार्य शैली में भव्यता लिए रहता है किंतु कभी-कभी अपनी बुद्धिमत्ता का उचित प्रयोग नही कर पाता है। कन्या कन्या राषि का बुध जातक को सभी प्रकार की सुख-सुविधा, अतिभाग्यवान, भव्य, तेजस्वी, बहुत बुद्धिमान और चरित्रवान बनाता है। वह अच्छे व्यवहार वाला, नीतिवान, कुषल लेखक, शस्त्रज्ञ तथा शत्रुओं को परास्त करने वाला होता है। वह ईष्वर से विषेष संबंध रखने वाला, कुषल कार्यकर्ता, धनी तथा जीवन में उन्नति करने वाला होता है। तुला तुला राषि में बुध व्यक्ति को शारीरिक कष्ट, कमजोर देह परंतु विभिन्न कलाओं में निपुणता प्रदान करता है। जीवन साथी से अच्छा तालमेल, अपूर्व बुद्धि, दूसरों की सहायता करने वाला परंतु व्यापार में हानि उठाने वाला बनाता है। वह संतुलित विचारों वाला, तीक्ष्ण बुद्धि वाला, अच्छा विचारक तथा दूसरों को प्रभावित करने की योग्यता वाला होता है। वृष्चिक वृष्चिक राषि में बुध की उपस्थिति जातक को रिष्तेदारों से विरोध तथा दूसरों से लड़ाई का कारक बनाती है। उसे अनेच्छित स्थान पर रहना पड़ सकता है। उसे विपत्ति संताप, शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें धन की हानि तथा अनिच्छा से दूसरों की सेवा करनी पड़ सकती है। धनु धनु राषि में बुध जातक को जीवन में समय-समय पर आर्थिक कष्ट देता है। किसी भी नए उपक्रम को शुरु करने में हमेषा बाधा आती है तथा अपने ही लोगों से सदा विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उसे संकटों, विरोध और क्लेषों से सामना करना पड़ता है। उसमें तुरंत समझने की योग्यता तथा चित्रवत स्मृति होती है किंतु गलत लोगों से वे जल्दी ही प्रभावित हो जाते हैं। मकर मकर राषि में बुध जातक को बुरे और दुव्र्यसनी लोगों से मैत्री का कारक होता है। उच्च वर्ग में मैत्री की ईच्छा रहती है किंतु अंतद्र्वंद्व के चलते कुछ विषेष लाभ नहीं प्राप्त कर पाते। प्रभुत्व पाने के लिए वह झूठ बोलने से भी नहीं चूकते। अतिव्ययी तथा झूठी प्रतिष्ठा व मान के कारण अपव्यय करने वाला होता है तथा अपनी योजनाओं में हानि उठाने वाला होता है। कुंभ कुम्भ राषि में बुध आर्थिक हानि तथा अकारण समस्याओं का कारक होता है। मित्रों के बीच मान की हानि तथा कार्यस्थल पर अस्थिरता को जन्म देता है। वह दूसरों के लिए नौकरी करने पर ही संतुष्टि व स्थिरता पा सकते हैं। ये नए विचारों को समझने में कुषल होते हुए भी, परंपरावादी, रूढ़िवादी होने के कारण उसका लाभ नहीं ले पाते। मीन मीन राषि में बुध व्यक्ति को शारीरिक रोगों से पीड़ित करता है, वह जीवन में विभिन्न दुख उठाने वाला, संकटों का सामना करने वाला तथा परिश्रमी होते हुए भी अधिक सम्पत्ति नहीं बना पाता। वह अनिष्चित मत वाला तथा एक ही विचार पर स्थिर नहीं रहने वाला होता है। कभी-कभी वह अपने ही कुविचारों का षिकार हो जाता है। अपने स्वयं का व्यवसाय करने पर वह गलत निर्णयों से भी परेषान रहता है।
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