
*******:-राहु से बनने वाले कुछ योग :-********** ...
*******:-राहु से बनने वाले कुछ योग :-********** 1:-कपट योग- जब कुंडली के चौथे घर में शनि हो और राहु बारहवें घर में हो तो कपट योग होता है इस योग के कारण कथनी और करनी में अंतर होता हैं । 2:-क्रोध योग- सूर्य बुध या शुक्र के साथ राहु लग्न में हो तो क्रोध योग होता है इस कारण जातक को लडाई झगड़ा, वाद विवाद के परिणामस्वरूप हानि और दुःख उठाना पड़ता है । 3:-अष्ट लक्ष्मी योग- जब राहु षष्ठम में और गुरु केंद्र(दशम) में हो तो अष्ट लक्ष्मी योग होता है इस योग के कारण व्यक्ति शांति के साथ यशस्वी जीवन जीता है । 4:-पिशाच बाधा योग- चंद्र के साथ राहु लग्न में हो तो पिशाच बाधा योग होता है इस योग के कारण पिशाच बाधा की तकलीफ सहना पड़ता है ।और व्यक्ति निराशा वादी अपने को घात पहुंचाने वाला होता है । नोट- 1- मेष, कर्क , तुला, मकर लग्न में अगर चंद्रमा राहु की युति केंद्र में हो तो शुभ फलदायक होता है । 2:-अगर त्रिकोण (5, 9)का स्वामी चंद्र हो और 5, 9 भाव में चंद्र राहु की युति हो तो शुभ फलदायक होता है । 3: -अन्य भावो में चंद्र राहु की युति होने से भयंकर आरोपो द्वारा उत्पन्न मुकदमेबाज़ी का सामना करना पड़ता है तथा नाना प्रकार का दुःख आदि भोगना पड़ता हैं । 5:-चाण्डाल योग- गुरु के साथ राहु की युति होने से चाण्डाल योग होता है इस योग के प्रभाव से व्यक्ति नास्तिक और पाखंडी होता हैं। नोट- गुरु के साथ केतु होने से उपासना योग होता है इस योग में व्यक्ति पुजा पाठ करने वाला होता है । 6:-ग्रहण योग- जब कुंडली में सूर्य राहु की युति हो तो ग्रहण योग होता है अगर यह युति लग्न में हो तो व्यक्ति क्रोधी होता हैं सेहत भी अच्छा नहीं होता है । नोट- वृष, सिंह, वृश्चिक, एवं कुंभ का लग्न हो और त्रिकोण में सूर्य राहु की युति हो तो वह शुभ फलदायक होता है । 7:-सर्प शाप योग- मेष या वृष्चिक राशि का राहु पंचम स्थान मे हो, पंचम या लग्न में मंगल गुरु हो या पंचम में मंगल राहु से युक्त हो सर्प शाप योग होता है इस योग में व्यक्ति की संतति मुसीबतों में फसती है या सड़क दुर्घटना होती है । 8:-परिभाषा योग -लग्न में या 3, 6, 11 में से किसी भी स्थान मे राहु हो तो परिभाषा योग होता है इस राहु पर शुभ ग्रह की दृष्टि होने से शुभ फलदायक होता हैं 9:-अरिष्ट भंग योग- मेष, वृषभ , कर्क , इन तीन राशियों में से कोई लग्न हो और राहु 9, 10, 11 में हो तो अरिष्ट भंग योग होता है यह शुभ फलदायक होता हैं । 11:-लग्न कारक योग- मेष, वृषभ या करकट लग्न हो और 2, 9, 10 इन स्थानों को छोड़ कर अन्य किसी स्थान में राहु हो तो लग्न कारक होता है यह योग सर्वारिष्ट निवारक होता हैं। 12:-पायालू योग- जब राहु और लग्नेश दोनों कुण्डली के दशम भाव में हो तो जातक माँ के गर्भ से पैरों के तरफ से जन्म लेता है इसे पायालू कहते है । 13:-राहु शनि युति योग- शनि राहु की युति लग्न में हो तो सेहत ठीक नहीं रहता है व्यक्ति हमेशा बीमार रहता है चतुर्थ स्थान में होने से माता को कष्ट होता है ।पंचम में होने पर संतति के लिए कष्ट दायक होता है सप्तम में पति-पत्नी के लिये कष्ट दायक होता है नवम में पिता के लिए कष्ट दायक होता है दशम में व्यापार एवं प्रतिष्ठा को हानि होता हैं परन्तु यदि गुरु की दृष्टि हो तो प्रभाव मे कमी आता है ।
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