
सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, १५ फरवरी रात्रि १२. ...
सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार, १५ फरवरी रात्रि १२. २५ मिनट (१६ फरवरी 00.२५ ) से १६ फरवरी सुबह ४.१७ तक रहेगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण दक्षिण जार्जिया, प्रशांत महासागर, चिली, ब्राजील और अंटार्कटिका आदि देशों में दिखाई देगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह सूर्य ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुम्भ राशि में लग रहा है. शतभिषा राहु का नक्षत्र है इसलिए जिन लोगों की कुंडली में राहु - सूर्य (ग्रहण दोष) दोनों ग्रह एक साथ एक ही भाव में हो, तो उन्हें ग्रहण काल में जन्मपत्री मे ग्रहण योग की जानकारके पास जाकरे उसका फलादेश और ये समय के दरमियाँन क्या उपाय करना है वो जानना चाहिए======इन चीजों का रखें ध्यान ग्रहण काल के समय खाना न खांए न ही कुछ पीयें, प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। इस समय नवग्रहों का दान करना भी लाभकारी रहेगा। जो विद्यार्थी अच्छा परिणाम चाहते हैं वे ग्रहण काल में पढाई शुरु न करें बल्कि ग्रहण के समय से पहले से शुरु कर ग्रहण के दौरान करते रहें तो अच्छा रहेगा। घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक कर रखें। ग्रहण से पहले रात्रि भोज में से खाना न ही बचायें तो अच्छा रहेगा। यदि दुध, दही या अन्य तरल पदार्थ बच जांयें तो उनमें तुलसी अथवा कुशा डालकर रखें इससे ग्रहण का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। ग्रहण समाप्ति पर पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें, देव मूर्ति को भी गंगाजल से स्नान करवायें व तदुपरांत भोग लगायें।\\\\\कब लगता है सूर्यग्रहण वैज्ञानिकों के अनुसार जब पृथ्वी चंद्रमा व सूर्य एक सीधी रेखा में हों तो उस अवस्था में सूर्य को चांद ढक लेता है जिस सूर्य का प्रकाश या तो मध्यम पड़ जाता है या फिर अंधेरा छाने लगता है इसी को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। क्या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण - जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।
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