
शनि राहु की युति का प्रभाव शनि में राहू का योगात...
शनि राहु की युति का प्रभाव शनि में राहू का योगात्मक प्रभाव हाइपर टेन्सन की बीमारिया देता है, जब मानसिक चिंताए अधिक लग जाती है तो किया जाने वाला भोजन नहीं पचता है, सोने वाली गोलिया लेने से नींद कभी प्राकृति रूप से नहीं आती है, किसी कठिन समस्या तथा खतरनाक परिस्थिति में शरीर के रियेक्सन में तनाव पैदा होता है, यह शरीर एक चलती फिरती संसार की सबसे बड़ी केमेस्ट्री लेब है, किसी भी प्रकार का तनाव विचार चिंता से शरीर में विभिन्न प्रकार के एन्जाइम्स पैदा होते है, इन सब कामिकल रियेक्सन के फलस्वरूप शरीर को सेल्यूलर लेबल पर अधिक आक्सीडेशन करना पड़ता है, वास्तव में इस दशा के अन्दर जो तनाव पैदा होता है वह शरीर की अस्सी प्रतिशत बीमारियों का कारण बनता है, वर्त्तमान में जो आपके शरीर की पहिचान होगी वह शनि और राहू इस प्रकार से शो करता है:- * पुतलियों का डायालेषण. * मुहं और गले का सूखना * चहरे की वेंस तथा आर्टरीज का सिकुड़ना, हाथ और पांव का पीला पद जाना, * दिल की धड़कन तेज होना * अन्तरंग भागो में इन्फेक्सन का पैदा हो जाना कारण शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति का कम हो जाना. * शरीर के हर अंग में पसीना अधिक आता है विशेष कर हथेली में * मानसिक स्थिति ऐसी बन जाती है कि रहने वाले स्थान को छोड़ देना ही ठीक रहेगा. * बार बार सिरदर्द * हाइपर टेन्सन और इस प्रकार से ब्लड प्रेसर की बीमारी जो लो होती है का पैदा हो जाना * गर्दन गर्दन के पीछे और पीठ में दर्द * हमेशा रोने की इच्छा करना * जल्दी से थकान और कमजोरी * नींद नहीं आना और डरावने सपने * धीरे धीरे पेट में अल्सर जैसी बीमारियों का पैदा हो जाना * एलर्जी और अस्थमा जैसे प्रभाव दिखाई देना * काम शक्ति का कम हो जाना संतान की पैदाइस में दिक्कत आदि लक्षण मिलते है.
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