
*आपकी कुंडली में है मंगल दोष तो अपनाएं ये उपाय!* ...
*आपकी कुंडली में है मंगल दोष तो अपनाएं ये उपाय!* नवग्रहों में मंगल एक ऐसा ग्रह है जिसे लेकर हर जातक को भय भी रहता है। भूमि पुत्र होने से मंगल को कृषि से जुड़ी चीजों का भी कारक माना जाता है, लेकिन साहसी और नव ग्रहों में सूर्य के बाद सेनापति की संज्ञा दिए जाने के कारण मंगल को पराक्रम साहस और शूरता का अधिपति ग्रह भी माना जाता है। मंगल शरीर में रक्त का कारक होता है अत: ज्योतिष शास्त्र में मंगल को लाल रंग का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह माना जाता है। कुंडली में यदि मंगल दोष है जिसकी वजह से व्यक्ति को विवाह संबंधी परेशानियों, रक्त संबंधी बीमारियों और भूमि-भवन के सुख में कमियां रहती हैं। कुंडली में जब लग्न भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है तब कुंडली में मंगल दोष माना जाता है। जानें- मंगल दोष का निवारण करने के लिए कौन-कौन से उपाय आजमाने चाहिए- *1* -हर मंगलवार को मंगलदेव की विशेष पूजन करना चाहिए। मंगलदेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय वस्तुओं जैसे लाल मसूर की दाल, लाल कपड़े का दान करना चाहिए। *2* - जिन लोगों की कुंडली में मंगलदोष है उनके द्वारा प्रतिदिन या प्रति मंगलवार को शिवलिंग पर कुमकुम चढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही शिवलिंग पर लाल मसूर की दाल और लाल गुलाब अर्पित करें। *3* - मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थिति मंगलनाथ में जहां भारत का एकमात्र पृथ्वी माता का मंदिर भी है वहां पर मंगल दोष के निवारण के लिए पूजा की जाती है। मंगल की पूजा अपनी पत्रिका या कुंडली में स्थिति मंगल दोष के अनुसार और किसी जानकार ज्योतिषि की सलाह के अनुसार की जानी चाहिए। *4* - मंगल दोष के निवारण के लिए मूंगा रत्न भी धारण किया जाता है। रत्न जातक की कुंडली में मंगल के क्षीण अथवा प्रबल होने या अंश के अनुसार उसकी डिग्री के हिसाब से पहना जाता है। किसी भी रत्न का मानक रत्ती के हिसाब से होता है अत: कुंडली में मंगल की स्थिति महादशा, अंतरदशा और प्रत्यंतर दशा के अनुसार रत्ती के हिसाब से मूंगा धारण करना चाहिए। *5* -कुंडली में यदि मंगल नीच का है अथवा बहुत ही कम डिग्री का है तो मंगल दोष के निवारण के लिए मंगल के जाप भी किए जा सकते हैं। इसके लिए मंत्र:- *ऊं भौम भौमाय नम:* अथइस योग के कारण हमेशा रहती है कन्फ्यूज रहने की समस्या - ज्योतिष में बुध को बुद्धि, सोचने समझने की क्षमता, निर्णय शक्ति, तर्क शक्ति, मष्तिष्क, बुद्धिपरक कार्य और पढ़ने की क्षमता आदि का कारक माना गया है अर्थात हमारे मष्तिष्क और बौद्धिक गातिविधियों को बुध ही नियंत्रित करता है कुंडली में बुध की सबल या निर्बल स्थिति ही हमारी बौद्धिक क्षमता और निर्णय शक्ति का स्तर निश्चित करती है........... चन्द्रमाँ को ज्योतिष में मूवमेंट या चलायमानता का कारक माना गया है क्योंकि नौ ग्रहों में चन्द्रमाँ की गति सबसे तेज है जो एक राशि में केवल दो से सवा दो दिन तक हो रहता है इसलिए चन्द्रमाँ को परिवइस योग के कारण हमेशा रहती है कन्फ्यूज रहने की समस्या - ज्योतिष में बुध को बुद्धि, सोचने समझने की क्षमता, निर्णय शक्ति, तर्क शक्ति, मष्तिष्क, बुद्धिपरक कार्य और पढ़ने की क्षमता आदि का कारक माना गया है अर्थात हमारे मष्तिष्क और बौद्धिक गातिविधियों को बुध ही नियंत्रित करता है कुंडली में बुध की सबल या निर्बल स्थिति ही हमारी बौद्धिक क्षमता और निर्णय शक्ति का स्तर निश्चित करती है........... चन्द्रमाँ को ज्योतिष में मूवमेंट या चलायमानता का कारक माना गया है क्योंकि नौ ग्रहों में चन्द्रमाँ की गति सबसे तेज है जो एक राशि में केवल दो से सवा दो दिन तक हो रहता है इसलिए चन्द्रमाँ को परिवर्तन, मूवमेंट और चलायमानता का कारक माना गया है इसी लिए कुंडली में बुध और चन्द्रमाँ का योग होने पर व्यक्ति को कुछ विशेष समस्याओं का सामना करना पड़ता है।........... यदि कुंडली में चन्द्रमाँ और बुध का योग हो अर्थात चन्द्रमाँ और बुध एक साथ हों तो ऐसे में व्यक्ति की बुद्धि अस्थिर होती है और व्यक्ति के निर्णय कभी स्थिर नहीं रहते, चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति के मस्तिष्क में योजनाएं तो बहुत बनती है परंतु उसके निर्णय हमेसा बदलते रहते हैं किसी भी एक कार्य का निश्चय करने के कुछ साम्य बाद ही मन में उस कार्य को ना करके दूसरे कार्य को करने का विचार आने लगता है, कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति की बुद्धि चलायमान होती है जिसका व्यक्ति की निर्णय शक्ति या डिसीजन पावर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर व्यक्ति को किसी भी बात का निर्णय करने में बड़ा संशय होता है और व्यक्ति हमेसा कन्फ्यूजन की स्थिति में रहता है ऐसे में व्यक्ति को किन्ही दो चीजों या बातों में से एक का चयन करने में बड़ी समस्या आती है और किसी एक बात का चयन करने के बाद अधिकांशतः व्यक्ति को लगता है के उसका यह निर्णय गलत था कहने का तात्पर्य यही है के चन्द्रमाँ बुध के योग से व्यक्ति के मस्तिष्क में संशय या भ्रम की स्थिति बनी रहती है, चन्द्रमाँ बुध के योग से व्यक्ति ओवर थिंकिंग अर्थात बहुत अधिक सोचने की आदत भी होती है चन्द्रमाँ बुध के योग में यदि चन्द्रमाँ की डिग्री बुध से अधिक हो तो इस योग की प्रबलता बढ़ जाती है यदि कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग हो ऐसे व्यक्ति को किसी भी बड़े या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले किसी अन्य योग्य व्यक्ति से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि कुंडली में चन्द्रमाँ बुध का योग होने पर अधिक कन्फ्यूजन रहती हो निर्णय लेने में समस्याएं आती हों या बुद्धि हमेशा अस्थिर रहती हो तो निम्नलिखित उपाय करें - 1. ॐ बुम बुधाय नमः का नियमित जाप करें। 2. प्रत्येक बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं। 3. सोमवार को मन्दिर में या गरीब व्यक्ति को दूध दान करें। 4. गणेश जी की उपासना करें। 5. किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं।
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