
*ग्रहों की प्रकृति के अनुसार ज्योतिषीय उपचार* यद...
*ग्रहों की प्रकृति के अनुसार ज्योतिषीय उपचार* यदि सूर्य किसी जातक की कुण्डली में खराब परिणाम दे रहा हो तो उस जातक के मुंह से बोलते समय थूक उछलता रहता है। शरीर के कुछ अंग आंशिक या पूर्ण रूप से नकारा होने लगते हैं। ऐसे जातकों को सुबह उठकर सूर्य देवता को अर्ध्य देना चाहिए और लाल मुंह के बंदर की सेवा करनी चाहिए। आठवें का सूर्य होने पर सफेद गाय के बजाय लाल अथवा काली गाय की सेवा करने के लिए कहा गया है। चंद्र माता की सेवा करने से चंद्रमा के शुभ फल मिलने शुरू होते हैं। घर के बुजुर्गों, साधू और ब्राह्मणों के पांव छूकर आशीर्वाद लेने से चंद्रमा के खराब प्रभाव को भी दूर किया जा सकता है। रात के समय सिराहने के नीचे पानी रखकर सुबह उसे पौधों में डालने से चंद्रमा का असर दुरुस्त होता है। घर का उत्तरी पश्चिमी कोना चंद्रमा का स्थान होता है। यहां पौधे लगाए जाएं और सुबह शाम पानी दिया जाए तो चंद्रमा का प्रभाव उत्तम बना रहता है। यदि मंगल खराब हो तो आंख में खराबी होना या संतान उत्पत्ति में बाधा आ रही हो तो इसे मंगल के खराब प्रभाव के तौर पर देखा जाता है। भाइयों की सहायता और ताया और ताई की सेवा करे तो मंगल का अच्छा प्रभाव मिलता है। लाल रंग का रुमाल पास में रखने से मंगल का खराब प्रभाव खत्म होता है। महिलाओं में मंगल का असर बढ़ाने के लिए उन्हें लाल चूड़ियां, लाल सिंदूर, लाल साड़ी, लाल टीकी लगाने के लिए सलाह दिया जाता है। बुध्द के बूरे प्रभाव होने पर गंध का पता न लगना और सामने के दांत गिरने लगे तो समझ लीजिए कि बुध का खराब प्रभाव आ रहा है। ऐसे में फिटकरी से दांत साफ करने से बुध का खराब प्रभाव कम होता है। बुध खराब होने से व्यापारियों का दिया या लिया धन अटकने लगता है। गायों को नियमित रूप से पालक खिलाने से यह रुका हुआ धन फिर से मिलने लगता है। छत पर जमा कचरा भी ऋण को बढ़ाता है। इसे हटाने से ऋण का बोझ कम होता है और व्यापार सुचारू रुप से चलता है। गुरु के बूरे प्रभाव को कम करने के लिऐ रमते साधू को पीले वस्त्र दान करने और भोजन कराने से गुरु के अच्छे परिणाम हासिल होते हैं।जिन जातकों की गुरू की दशा चल रही हो, अगर वे नियमित रूप से अपने ईष्ट के मंदिर जाएं और पीपल में जल सींचें तो गुरु की दशा में अच्छे लाभ हासिल कर सकते हैं। इसी दशा में स्कूल एवं धर्म स्थान में नियमित अंतराल में दान करना भी भाग्य को बढ़ाता है। शुक्र के खराब होने से चमड़ी के रोग और अंगूठे पर चोट लगने से शुक्र के खराब प्रभाव का पता चलता है।अगर प्रतिदिन रात के समय अपने हिस्से की एक रोटी गाय को दें तो शुक्र का प्रभाव यानी समृद्धि तेजी से बढ़ती है। शुक्र का खराब प्रभाव ज्यादा हो तो रात के समय बैठी गाय को गुड़ देना लाभदायक होता है। सुहागिनों को समय-समय पर सुहाग की वस्तुएं देने से शुक्र के प्रभाव बढ़ता है। शनि के खराब होने से जूते खोने, घर में नुकसान, पालतू पशु मरने और आग लगने से शनि के खराब प्रभाव को माना जाता है।जिसके निदान के लिऐ साधु लोगों को नियमित रूप से तेल देने, लोहे का तवा, चिमटा या अंगीठी दान करने से शनि का प्रभाव अच्छा हो जाता है। शनि के अच्छे प्रभाव लेने के लिए नंगे पैर मंदिर जाना चाहिए। राहू के खराब होने से अनचाही समस्याएं आती हैं घर का दक्षिणी पश्चिमी कोना राहू का है। इस कोने में कभी गंदगी नहीं रहनी चाहिए। घर के दक्षिणी पूर्वी कोने में आवश्यक रूप से हरियाली का वास रखना चाहिए। परिवार का जो सदस्य राहू से पीडि़त हो उसे हरियाली के पास रखें। अंधेरे और गंदगी वाले कोनों में राहू का वास होता है। अगर हर कोने को साफ और उजला रखेंगे तो राहू के खराब प्रभाव से दूर रहेंगे। केतू के खराब होने से जोड़ों का दर्द और पेशाब की बीमारी मुख्य रूप से केतू की समस्या के कारण आते हैं। कान बींधना, कुत्ता पालना केतू के खराब प्रभाव को कम करता है। संतान को कष्ट होने पर काला-सफेद कंबल साधू को देने से कष्ट दूर होता है।
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