
*परिवार में कलह, दूषित वैवाहिक जीवन – कारण और उपचा...

*परिवार में कलह, दूषित वैवाहिक जीवन – कारण और उपचार-* वैसे तो परिवार के प्रत्येक सदस्य किसी भी तरह की अशांति नही चाहते, लेकिन वैचारिक भिन्नता या किसी भी तरह की असुरक्षा का भाव पारिवारिक सदस्यों के बीच बढ़ती दूरी का कारण बनता है. परिवार में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मुखिया की होती है. यदि मुखिया का दृष्टिकोण निष्पक्ष और सुलझा हुआ हो तो पारिवारिक शांति को बनाये रखना कठिन नही है. वर्तमान काल में विवाह करना और वैवाहिक रिश्ते निभाना दोनों ही टेढ़ी खीर साबित हो रहे हैं। सरसरी तौर पर इसकी वजह वर-वधू की वैचारिक सोच, परिवार वालों की आधुनिकता के बीच परंपरा से संबंधित उम्मीद, आर्थिक कमजोरी तथा गृह तथा कार्यालयीन कार्यों के बीच एक दूसरे के लिए समय न निकाल पाना बताया जा रहा है। वहीं ज्योतिषीय मैलापक पद्धति को भी नजरअंदाज कर देना भी दोनों परिवारों के दु:ख का कारण बन रहा है। कई बार तो विवाह न होना भी बड़ी समस्या का रूप ले रहा है। ऐसे में आज भी अत्यन्त आवश्यक है कि ज्योतिषीय सलाह ली जाए। यदि हम विवाह के संबंध में इन बातों का ध्यान रखें तो जीवन के वैवाहिक सुख का आनंद ले पाएँगे। इसके लिए कुछ बिन्दुओं को समझना पड़ेगा- वस्तुत: ज्योतिषशास्त्र मानता है कि जब विवाह योग बनते हैं, तब यदि उन्हें टाल दिया जाए तो आगे विवाह में बहुत देरी हो जाती है। कई मर्तबा तो विवाह करना चिंता का विषय बन जाता है। वैसे विवाह में देरी होने का एक कारण जातकों का मंगली होना भी है। प्राय: इनके विवाह के योग 28 वर्ष की उम्र के बाद बनते हैं। ऐसे में जिन जातकों के विवाह में विलंब हो जाता है, उनके ग्रहों की दशा ज्ञात कर विवाह योग का काल जाना जा सकता है। आचार्यों के अनुसार जिस वर्ष शनि और गुरु दोनों सप्तम भाव या लग्न को देखते हों, तब विवाह के योग बनते हैं। सप्तम भाव में स्थित ग्रह या सप्तमेश के साथ बैठे ग्रह की महादशा-अंतरदशा में विवाह संभव है। सप्तमेश की महादशा-अंतरदशा या शुक्र-गुरु की महादशा-अंतरदशा में विवाह का प्रबल योग रहता है। *कलह क्यों होती है? -* परिवार में कलह हो तो गृहस्थ जीवन तबाह हो जाता है। परिवार रूपी रथ के दोनों पहिए अलग-अलग हो जाते हैं जिसका प्रभाव संपूर्ण परिवार पर पड़ता है और परिवार के सभी सदस्यों की खुशहाली पर ग्रहण सा लग जाता है। कलह क्यों होती है, इसके ज्योतिषीय कारण क्या हैं, क्या करें कि कलह हो ही नहीं, यह सब जानने के लिए पढ़ें यह आलेख… रिवार रूपी रथ के पहिए हैं पति और पत्नी। यदि इनके मध्य वैचारिक एवं शारीरिक संबंध अच्छे नहीं होंगे तो परिवार में कलह होना निश्चित है। पारिवारिक कलह गृहस्थ-सुख को नष्ट कर देती है। इसके पीछे पति-पत्नी के पारस्परिक संबंधों का अच्छा न होना अथवा परिवार के अन्य सदस्यों के मध्य वैचारिक असमानता मूल कारण होती है। भरपूर पारिवारिक सुख तभी मिल पाता है जब पति-पत्नी एक दूसरे को भली-भांति समझे उनमे वैचारिक समानता हो, शारीरिक रूप से भी एक दूसरे को जानें और एक दूसरे को भरपूर सहयोग दें। दाम्पत्य सुख के उपाय—- १॰ यदि जन्म कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान स्थित मंगल होने से जातक को मंगली योग होता है इस योग के होने से जातक के विवाह में विलम्ब, विवाहोपरान्त पति-पत्नी में कलह, पति या पत्नी के स्वास्थ्य में क्षीणता, तलाक एवं क्रूर मंगली होने पर जीवन साथी की मृत्यु तक हो सकती है। अतः जातक मंगल व्रत। मंगल मंत्र का जप, घट विवाह आदि करें।
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