
अधिकतर ज्योतिषी जन्म कुंडली मेलापक करते समय समग्र ...
अधिकतर ज्योतिषी जन्म कुंडली मेलापक करते समय समग्र विषय पर विचार न करके विवाह के लिए सलाह दे देते हैं। गुण मिलाकर सलाह दे देने से वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं रहता, गुण के साथ-साथ ग्रहों का मिलान करना भी आवश्यक है ग्रह मिलान करते समय अच्छा स्वास्थ्य, शालीन प्रभाव, अच्छा भाग्य, समुचित शिक्षा, पतिव्रता योग, संतान सुख, आयु, रोग, दारिद्र, विषकन्या योग, व्यभचारिणी योग एवं विधवा योग इत्यादि विषय पर विचार करना अति आवश्यक है साथ-साथ भोग उपभोग, रति सुख, क्रय शक्ति इत्यादि विषय भी विचारणीय है क्योंकि दाम्पत्य जीवन के लिए ये विषय महत्वपूर्ण हैं। कई स्थान पर ये देखने में आया है, कि उपरोक्त विषयों की कमी के कारण दाम्पत्य जीवन में दरार उत्पन्न होती है जिसके कारण तलाक हो जाते हैं। बहुविवाह योग कई कारणों से होते हैं शास्त्रानुसार बहुविवाह के वारे में महर्षि यज्ञवल्क्य स्मृति में कहा गया है- *नष्ट मृते प्रव्रज्यिते क्लीवे च पतिते पतौ।* *पंचस्वापत्सु नारीणां पतिरन्यो विधीयते।।* अर्थात् विवाह के वाद पति यदि विदेश चला जाए और बारह वर्ष तक लौटकर न आए, अल्प समय में मृत्यु के वाद, सन्यासी हो जाने पर, पति के नपुंसक होने या पति के दुराचारी होने पर, कन्या का विवाह किसी अन्य पुरुष के साथ किया जा सकता है। परंतु आजकल जिस प्रकार बहुविवाह हो रहा है वह एक खेल की तरह बन गया है, कारण यह युग गंधर्व विवाह (प्रेम विवाह) की ओर चला गया है कई लोग ज्योतिषाचार्य के पास जाकर आज के लोग विवाह का मुहूर्त पूछते हैं कि फेरे कब लिए जाएं? परंतु, युग का प्रभाव इतना है कि फेरे लेने का सही समय बैंड बाजा और नाच गानों में व्यतीत हो जाता है लोग सोचते हैं कि जब कुंडली अच्छी तरह से मिली हो, तो मुहूर्त की क्या उपयोगिता है लेकिन जीवन के जोड़ने का समय अगर विषाक्त हो जाएगा तब क्या मधुर दाम्पत्य जीवन व्यतीत होगा?
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