
*सूर्य देव को जल देने की सही विधि क्या है और सूर्य...

*सूर्य देव को जल देने की सही विधि क्या है और सूर्य को अर्ध्य देते समय भूलकर भी ये गलतियाँ नही करें?* हिन्दू धर्म में सनातनकाल से ही सूर्य देव की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। सूर्य देव की पूजा में सूर्य को जल देना जिसे हम सूर्य को अर्ध्य देना भी कहते है सबसे महत्वपूर्ण है। सम्पूर्ण सृष्टि में उर्जा के एकमात्र स्त्रोत सूर्यदेव ही है। इस सृष्टि के सृजन में भी सूर्यदेव का बहुत महत्व है। इसलिए सूर्य देव की पूजा हमको स्पष्ट रूप से फल प्रदान करने वाली है। विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण आदि में विशेषरूप से अंकित की गई है। सूर्यदेव के उदय होते ही संपूर्ण विश्व का अंधकार दूर हो जाता है और चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश फैल जाता है। सृष्टि के महत्वपूर्ण आधार सूर्य देव ही हैं। सूर्य की किरणों को आत्मसात करने से शरीर और मन स्फूर्तिवान होता है। स्वास्थ्य संबधी समस्याएं होने पर या जीवन में किसी भी प्रकार की अन्य समस्या होने होने पर सूर्य पूजा से अवश्य ही लाभ प्राप्त होता है। शरीर से रोगों को दूर करने में सूर्य देव की आराधना करना सर्वोतम होता है। यदि आप नियमित रूप से सूर्य देव को जल देते है तो आप में नेतृत्व करने की क्षमता का विकास होता है। शरीर बलवान, निरोग, हष्ट-पुष्ट, सकारात्मक सोच, तेज पराक्रम और उत्साह की वृद्धि होती है। सूर्य देव को पिता, स्वास्थ्य, राज्य और औषधि का कारक माना गया है। इसलिये पिता की सेवा करने से पिता का आदर सम्मान करने से सूर्य देव स्वतः ही प्रसन्न होने लगते है। यदि आप सूर्य देव की आराधना द्वारा सूर्य देव को प्रसन्न करते है तो आपके जीवन से हर बाधा नष्ट होने लगती है व जीवन में प्रसन्नता का संचार होने लगता है। आइये जानते है किन-किन जातकों को सूर्य देव को जल देना चाहिए या उनकी उपासना करनी चाहिए : – जिस किसी जातक की कुंडली में सूर्य कमजोर हो। जिस किसी जातक में आत्मविश्वास की कमी हो उन्हें सूर्य को जल अवश्य देना चाहिए। जो व्यक्ति एक निराशावादी जीवन जीने को मजबूर हो रहा है उसे सूर्य देव की उपासना अवश्य करनी चाहिए। जो जातक घर-परिवार में और समाज में मान-सम्मान चाहते है उन्हें भी सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए। प्रशासन में अच्छे पद की इक्षा रखने वाले छात्र भी सूर्य देव की उपासना अवश्य करें। सूर्य देव की उपासना के प्रकार : – सूर्य देव को प्रसन्न करने के कई प्रकार के उपाय है जैसे :- नवगृह मंदिर जाकर सूर्य देव की पूजा करना , पिता की सेवा करना व उनका सदैव आदर करना, सूर्यमंत्र या गायत्री मन्त्र जप करना और सूर्य को जल देना जिसे हम सूर्य को अर्ध्य देना भी कहते है। सूर्य को अर्ध्य देकर सूर्यदेव को प्रसन्न करना बहुत सरल है। प्रारंभ में आप सूर्य को जल देकर व पिता की सेवा करके सूर्य देव को प्रसन्न कर सकते है। सूर्य को जल देने की सही विधि : – सूर्य उदय के एक घंटे बाद तक ही सूर्य को जल देना सही होता है। सूर्य उदय के एक घंटे के भीतर अर्ध्य देने से सूर्य देव प्रसन्न होते है। प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत होकर किसी खुले स्थान में जाए जहाँ से सूर्यदेव आपको स्पष्ट दिखाई देतें हो। अब आप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके खड़े हो जाये। एक तांबे के पात्र में जल भरकर इसमें थोड़े चावल , थोड़ी चीनी, पुष्प डाले व कुमकुम द्वारा जल में छीटे लगाये। अब आप सूर्य देव के सामने खड़े होकर तांबे के पात्र से दोनों हाथों से जल नीचे जमीन पर छोड़ते जाये। ध्यान दे तांबे के पात्र को अपने सीने के सामने रखे और सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए पात्र को कंधो से ऊपर तक ले जाने का प्रयास करें। पात्र द्वारा नीचे गिरने वाली जलधारा में सूर्य के प्रतिबिम्ब के दर्शन करने का प्रयास करें। सूर्य को जल देते समय निरंतर इस मंत्र का जप करते जाए : ” ॐ सूर्याय नमः ” । सूर्य को जल देने के उपरान्त नीचे झुककर जल को स्पर्श करे और अंत में खड़े होकर हाथ जोड़ते हुए सूर्य देव को प्रणाम करें । सूर्य को जल देते समय ये गल्तियाँ भूलकर भी न करें : – बिना स्नान किये सूर्य को जल कभी न दें। सूर्य को जल देते समय आपका मुख सूर्य की ओर ही होना चाहिए। और भूलकर भी पिता का अनादर न करें। कभी बादल होने के कारण सूर्य देव न दिखें तो जल देते समय आपका मुख पूर्व दिशा की तरफ ही होना चाहिए। सूर्य को जल देते समय जल पात्र को सिर से नीचे न रखे। जल पात्र को सिर से ऊपर ही रखे इससे सूर्य की किरणें सीधे आप पर पढ़ती है। जल पात्र को दोनों हथेलियों में इस तरह पकड़े कि आपकी उंगलियां व अंगूठा जलपात्र को न छुए। सूर्य को जल देते समय चांदी, शीशे, स्टील, प्लास्टिक, के पात्र का उपयोग नहीं करें केवल मात्र लोहे या तांबे के पात्र का उपयोग करना चाहिये। यदि आप समय के अभाव रहते प्रतिदिन सूर्य देव को जल देने के लिए समय नहीं निकाल पाते है तो कम से कम रविवार के दिन अवश्य ही उन्हें जल अर्पित करें। रविवार सूर्य देव का दिन होता है। इस दिन सूर्य देव की आराधना करना विशेष रूप से फलदायी होता है।
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