
*पारिवारिक अशांति मे वास्तुशास्त्र का संबंध* परिवा...
*पारिवारिक अशांति मे वास्तुशास्त्र का संबंध* परिवार की शांति और व्यक्ति के जीवन में मे सफलता के अनुपात का पारस्परिक सम्बन्ध होता है। घर मे जितनी शांति होगी व्यक्ति उतना ही सफल सिद्ध होगा। परन्तु घर मे अशांति का वातावरण हो और घर विवाद हो तो घर परिवार मे सफलता के ग्राफ उतना ही नीचे चला जाता है। जानते ये क्यो होता है? ये सब घर मे वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि घर के द्वार न हो तो भी होता इसके लिए आपको नीचे👇🏿चित्र दिया जारहा के अनुरूप यदि घर के द्वार होतो निम्न प्रकार से घर मे अशांति उत्पन होती है। (1)यदि घर के द्वार सर्प (वासुकि) *26 नम्बर* मे होतो पिता पुत्र मे सदैव विरोध रहता है। (२) यदि घर के द्वार आदिति *३१ नम्बर* मे होतो स्त्रियों मे दोष उत्पन्न हो जाता है और व्यक्ति व्यथित रहता है। (३) यदि घर के द्वार दिति *३२ नम्बर* मे होतो निर्धनता के कारण घर मे अशांति रहती है। (४) यदि घर के द्वार रवि *५ नम्बर* मे होतो घर मे रहने वाले सभा लोग अकारण क्रोध करते है जिससे घर मे कभी भी शांति नही रह पाती है। (५) यदि घर के द्वार सत्य *6 नम्बर* मे होतो घर मे झूठ बोलने की घर मे रहने वालो की आदत सी हो जाती है। (६) यदि घर के द्वार पुषा, *१०, नम्बर* मे होतो घर मे दुर्भाग्य देखने को मिलता है। (७) यदि घर के द्वार वितथ *११ नम्बर* मे होतो निकट के रिश्तेदार की कुटिलता के कारण पारिवारिक वातावरण दूषित हो हो जाता है। (८)यदि घर के द्वार यम, गंधर्व, भृंगराज, मृग, पितृ, दौवारिक *१३से १८ नम्बर* मे होतो घर मे ऐसा कारण उत्पन होता है जिसमे चाहे निकट संबंधियों हो या पुत्र-पौत्र आदियो के मध्य कलह और अशांति का वातावरण बना रहता है जिससे पुरे परिवार नेतृत्व विहीन नजर आता है पुरा परिवार परिश्रम तो करता है परन्तु असफलता सदैव घेरे रहती है । (९)यदि किसी घर के वायव्य कोण में *२५* (पश्चिम - उतर) विवाहित व्यक्ति सोता है तो उसका मन घर मे नही लगता है और वह घर छोड़ने की सोचता है। यदि नौकर वायव्य कोण में सोता है तो बार-बार छोडकर भगेगा। यदि पुत्रवधू सोती है तो उसका मन घर में नही लगेगा। (१०)यदि वायव्य कोण(पश्चिम - उतर) *२५*में रसोई हो और संयुक्त परिवार हो और बहुएं जो रसोई मे काम करती है उनका मन रसोई कार्य मे नही लगता है परिणाम सरूप एक-दुसरे पर आरोप - प्रत्यारोपण करती है। यदि कोई विवाहित पुरुष वायव्य कोण में सोता है तो उसका मन घर मे नही लगता है और घर से बाहर मन लगाने के उपाय खोजता है लम्बे समय तक सोने वाले पर चरित्र दोष भी उत्पन होने लग जाते हैं। (११)यदि विवाहित दम्पति अग्नि कोण (पूर्व - दक्षिण) *9*मे शयन करते है तो उनके मन मे अशांति भर जाती है और परस्पर एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं यदि दम्पति नियमित अग्नि कोण में शयन करे तो वे परस्पर एक - दुसरे के विपरित मुहं करके शयन करते मिलेगे, यदि दम्पति लंबे समय तक अग्नि कोण मे 10-12साल शयन करे तो गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। (१२) यदि गृह स्वामी और उनकी पत्नी ईशान कोण (उतर- पूर्व) या अग्नि कोण (पूर्व - पश्चिम) मे शयन करे और पुत्र— पुत्रवधु) नैऋत्य कोण (दक्षिण - पश्चिम) मे शयन करे तो भी घर मे अशांति रहती है और पुत्रवधू सास पर भारी रहती है और छोटा भाई नैऋत्य कोण में शयन करे और बडा भाई दक्षिण या उतर या अन्य किसी भी दिशा मे शयन करे तो घर में कलह अशांति रहती है। (१३)यदि घर के बच्चे दक्षिण या नैऋत्य कोण में शयन करे तो बच्चे आलसी, निद्रालु, जिद्दी प्रवृत्ति के हो जाते हैं। (१४)यदि घर के बच्चो को वायव्य कोण (दक्षिण - पश्चिम) मे शयन कराये तो बच्चों का मन पढाई मे नही लगता और असफलता मिलती है जिसके कारण घर परिवार मे अशांति का वातावरण बना रहता है।
Keywords
Subscribe for latest offers & updates
We hate spam too.
