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*।।श्री गणेशाय नमः।।* *※══❖═══▩ஜ۩۞۩ஜ▩═══❖══※* *◆||सास-बहू के सम्बंध एवं वास्तु शास्त्र◆||* सास-बहू का सम्बंध सदैव से ही घर-घर में चर्चा का विषय रहा है, परन्तु यदि हम थोड़ा गम्भीरता से वास्तु-नियमों की पालना करें तो हम इन सम्बन्धों में आसानी से मधुरता की चाशनी घोलने में सफल हो सकते हैं और परिवारों को टूटने से भी बचा सकते हैं। घर के मुखिया एवं उसकी पत्नी (गृहस्वामिनी), या उनकी अनुपस्थिति में जेठ-जिठानी (बड़ी बहू) को दक्षिण दिशा के कमरे में दक्षिण की ओर सिर और उत्तर की ओर पैर करके सोना चाहिये। यदि ये सम्भव न् हो तो पूर्व की ओर सिर और पश्चिम की ओर पैर करके सोना चाहिये। सास यदि जीवित हैं तो बहू को या उनकी अनुपस्थिति में देवरानी को कभी भी दक्षिण दिशा के कमरे में नहीं सोना चाहिये। देवरानी या बहू को कभी भी आग्नेय या दक्षिण-पूर्व के कमरे में नहीं सोना चाहिए, इससे सास से मतभेद बने रहेंगे। इसके अतिरिक्त वायव्य कोण अर्थात उत्तर-पश्चिम दिशा के कमरे में भी कभी बहू को नहीं सुलाना चाहिये अन्यथा उसमें उच्चाटन का भाव आने लगता है और वो अलग होकर घर बसाने के सपने देखने लगेगी। वास्तु अनुसार सास या बड़ी बहू को दक्षिण, उससे छोटी बहू को पश्चिम, क्रमवार उससे छोटी को पूर्व और उससे भी छोटी को ईशान के कमरे में सुलाना या शयन कराना चाहिए। शयन कक्ष के डबल-बेड पर कभी भी डबल गद्दे नहीं बिछाने चाहिये। इससे उनमें परस्पर तनाव उत्पन्न होने लगता है और अलग-अलग होने की संभावनाएं बनने लगती हैं। इसलिए यथासंभव डबल-बेड पर एक डबल आकार का सिंगल गद्दा ही बिछाना चाहिये। तरीके और भी हो सकते हैं, परन्तु अभी बस इतना ही
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