
गुरु ग्रह - विद्या , बुद्धि , संतान , चर्बी (म...

गुरु ग्रह - विद्या , बुद्धि , संतान , चर्बी (मोटापा ) , आध्यात्मिक एवं धार्मिक कार्य , शिक्षक , सद्गुण , कन्या के विवाह के कारक , उच्च पद , के कारक होते हैं । यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो या पीड़ित हो जाए तो यह बीमारियां होने की संभावना रहती है । मोटापा , पेट की समस्या , मधुमेह , किडनी , लिवर , कफ , कर्ण संबंधित रोग , यदि जन्म कुंडली में फलादेश के हिसाब से गुरु ग्रह लाभ दे रहा हो एवं कमजोर हो तो पुखराज सोने या पीतल में गुरुवार को धारण करना चाहिए । जब तक आपके पास पुखराज धारण करने की सामर्थ्य नहीं है तब तक आप केले की जड़ या हल्दी की गांठ धारण कर सकते हैं । हल्दि या केसर का तिलक लगाएं । हल्दी की माला से मंत्र जाप करें । ।। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः ।। यदि फलादेश के हिसाब से गुरु ग्रह किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो इससे संबंधित दान किसी ब्राह्मण , पुरोहित या गुरु को करना चाहिए एवं उपाय करना चाहिए । दान - पीला वस्त्र , हल्दी , चने की दाल , धार्मिक पुस्तक , पिला फल उपाय - बुधवार को रात को चने की दाल भिगोकर रखें गुरुवार को प्रातः रोटी में चने दाल हल्दी एवं नमक भर के गाय को खिलाएं । पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें । किसी सच्चे साधु , महात्मा या गुरु का अपमान नहीं करना चाहिए ।
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