
प्राचीन काल से एक मान्यता है कि ध्वज में हनुमानजी ...

प्राचीन काल से एक मान्यता है कि ध्वज में हनुमानजी का वास होता है, अतः इसको "भवन अथवा वाहन" पर लगाने से समस्त वास्तुदोषोऔर ग्रहदोषो का नाश होता है। इसी मान्यता के आधार पर प्राचीन भारतमें हर भवन अथवा वाहन पर ध्वज लगाया जाता था । आश्चर्य की बात है कि जब तक इस प्रथा का पालन होता रहा भारत विश्वगुरु बना रहा.. यदि आपके परिवार में दिन - रात झगड़े हो रहे, बरकत ख़तम हो रही है, तो समझ लीजिये कि घर में राहु केतु का प्रवेश हो चुका है। ज्योतिष के अनुसार राहु को रोग, शोक व दोष का कारक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि घर के उत्तर पश्चिम में ध्वजा लगाने से घर में रहने वाले सदस्यों के रोग, शोक व दोष का नाश होता है और घर की सुख व समृद्धि बढ़ती है। ध्वजा या झंडा लगाने से घर में रहने वाले सदस्यों के रोग, शोक व दोष का नाश होता है और घर की सुख व समृद्धि बढ़ती है। वास्तु के अनुसार भी ध्वजा को शुभता का प्रतीक माना गया है।माना जाता है कि घर पर ध्वजा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश तो होता ही है साथ ही घर को बुरी नजर भी नहीं लगती है। ध्वज लाल रंग का होना चाहिये भगवा ध्वज में "सूर्य का तेज समाया हुआ है। यह भगवा रंग त्याग, शौर्य, आध्यात्मिकता का प्रतीक है। भगवान् श्रीकृष्ण के द्वारा सारथ्य किये गये अर्जुन के रथ पर भगवा ध्वज ही विराजमान था। भगवा रंग भारतीय संस्कृति का प्रतीक है| उसके बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती है| वेद, उपनिषद्, पुराण श्रुति इसका यशोगान करते हैं| संतगण इसकी ओंकार, निराकार या साकार की तरह पूजा अर्चना करते हैं| सुबह 5, बजे से 7 बजे के बीच घर कि छत पर ध्वज लगाने हेतु श्रेष्ठ मुहूर्त होता है ध्वज को लेे जाकर सबसे पहले अपने इष्ट देव या श्री बजरंगबली जी के मन्दिर जाकर उनके चरणों में रखें। फिर उनके चरणों का सिंदूर ध्वज पर लगाकर प्रार्थना करे कि "प्रभु! आपका आशीर्वाद और शक्ति इस ध्वज में प्रदान करें और जैसे ध्वज लहराये उसी तरह मेरी भी विजय संसार में हो।" यदि हो सके तो एक ध्वज भगवान् के मन्दिर में भी अर्पित करें। कुछ समय बाद आप चमत्कार देखें कि जिंदगी में कितना परिवर्तन आता है।
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