
राहु के गुण अवगुण . राहु छाया ग्रह है, ग्रन्थों मे...
राहु के गुण अवगुण . राहु छाया ग्रह है, ग्रन्थों मे इसका पूरा वर्णन है, और श्रीमदभागवत महापुराण में तो शुकदेवजी ने स्पष्ट वर्णन किया कि यह सूर्य से १० हजार योजन नीचे स्थित है, और श्याम वर्ण की किरणें निरन्तर पृथ्वी पर छोडता रहता है, यह मिथुन राहि में उच्च का होता है धनु राशि में नीच का हो जाता है, राहु और शनि रोग कारक ग्रह है, इसलिये यह ग्रह रोग जरूर देता है। काला जादू तंत्र टोना आदि यही ग्रह अपने प्रभाव से करवाता है।अचानक घटनाओं के घटने के योग राहु के कारण ही होते है, और षष्टांश में क्रूर होने पर ग्रद्य रोग हो जाते है।राहु के बारे में हमे बहुत ध्यान से समझना चाहिये, बुध हमारी बुद्धि का कारक है, जो बुद्धि हमारी सामान्य बातों की समझ से सम्बन्धित है, जैसे एक ताला लगा हो और हमारे पास चाबियों का गुच्छा है, जो बुध की समझ है तो वह कहेगा कि ताले के अनुसार इस आकार की चाबी इसमे लगेगी, दस में से एक या दो चाबियों का प्रयोग करने के बाद वह ताला खुल जायेगा, और यदि हमारी समझ कम है, तो हम बिना बिचारे एक बाद एक बडे आकार की चाबी का प्रयोग भी कर सकते है, जो ताले के सुराख से भी बडी हो, बुध की यह बौद्धिक शक्ति है क्षमता है, वह हमारी अर्जित की हुई जानकारी या समझ पर आधारित है, जैसे कि यह आदमी बडा बुद्धिमान है, क्योंकि अपनी बातचीत में वह अन्य कई पुस्तकों के उदाहरण दे सकता है, तो यह सब बुध पर आधारित है, बुध की प्रखरता पर निर्भर है। आइये जानें राहु से बनने वाले शुभ अशुभ गुण व दोष:- . 1. राहु कूटनीति का ग्रह है राहु कूटनीति का सबसे बडा ग्रह है, राहु जहां बैठता है शरीर के ऊपरी भाग को अपनी गंदगी से भर देता है, यानी दिमाग को खराब करने में अपनी पूरी पूरी ताकत लगा देता है। दांतों के रोग देता है, शादी अगर किसी प्रकार से राहु की दशा अन्तर्दशा में कर दी जाती है, तो वह शादी किसी प्रकार से चल नही पाती है, अचानक कोई बीच वाला आकर उस शादी के प्रति दिमाग में फ़ितूर भर देता है, और शादी टूट जाती है, कोर्ट केश चलते है, जातिका या जातक को गृहस्थ सुख नही मिल पाते है।इस प्रकार से जातक के पूर्व कर्मो को उसी रूप से प्रायश्चित कराकर उसको शुद्ध कर देता है। . 2. राहु की अपनी कोई राशि नही है राहु की अपनी कोई राशि नही है, यह जिस ग्रह के साथ बैठता है वहां तीन कार्य करता है। १.यह उस ग्रह की पूरी शक्ति समाप्त कर देता है। २.यह उस ग्रह और भाव की शक्ति खुद लेलेता है। ३.यह उस भाव से सम्बन्धित फ़लों को दिलवाने के पहले बहुत ही संघर्ष करवाता है फ़िर सफ़लता देता है। कहने का तात्पर्य है कि बडा भारी संघर्ष करने के बाद सत्ता देता है और फ़िर उसे समाप्त करवा देता है। . 3. राहु जेल और बन्धन का कारक है राहु का बारहवें घर में बैठना बडा अशुभ होता है, क्योंकि यह जेल और बन्धन का मालिक है, १२ वें घर में बैठ कर अपनी महादशा अन्तर्दशा में या तो पागलखाने या अस्पताल में या जेल में बिठा देता है, यह ही नही अगर कोई सदकर्मी है, और सत्यता तथा दूसरे के हित के लिये अपना भाव रखता है, तो एक बन्द कोठरी में भी उसकी पूजा करवाता है, और घर बैठे सभी साधन लाकर देता है। यह साधन किसी भी प्रकार के हो सकते है। . 4. राहु संघर्ष करवाता है हजारों कुन्डलियों को देखा, जो महापुरुष या नेता हुये उन्होने बडे बडे संघर्ष किये तब जाकर कहीं कुर्सी पर बैठे, जवाहर लाल नेहरू सुभाषचन्द्र बोस सरदार पटेल जिन्होने जीवन भर संघर्ष किया तभी इतिहास में उनका नाम लिखा गया, हिटलर की कुन्डली में भी द्सवें भाव में राहु था, जिसके कारण किसी भी देश या सरकार की तरफ़ मात्र देखलेने की जरूरत से उसको मारकाट की जरूरत नही पडती थी। . 5. राहु १९वीं साल में जरूर फ़ल देता है यह एक अकाट्य सत्य है कि किसी कुन्डली में राहु जिस घर में बैठा है, १९ वीं साल में उसका फ़ल जरूर देता है, सभी ग्रहों को छोड कर यदि किसी का राहु सप्तम में विराजमान है, चाहे शुक्र विराजमान हो, या बुध विराजमान हो या गुरु विराजमान हो, अगर वह स्त्री है तो पुरुष का सुख और पुरुष है तो स्त्री का सुख यह राहु १९ वीं साल में जरूर देता है। और उस फ़ल को २० वीं साल में नष्ट भी कर देता है। इसलिये जिन लोगों ने १९ वीं साल में किसी से प्रेम प्यार या शादी कर ली उसे एक साल बाद काफ़ी कष्ट हुये। राहु किसी भी ग्रह की शक्ति को खींच लेता है, और अगर राहु आगे या पीछे ६ अंश तक किसी ग्रह के है तो वह उस ग्रह की सम्पूर्ण शक्ति को समाप्त ही कर देता है। . 6. राहु की दशा १८ साल की होती है राहु की दशा का समय १८ साल का होता है, राहु की चाल बिलकुल नियमित है, तीन कला और ग्यारह विकला रोजाना की चाल के हिसाब से वह अपने नियत समय पर अपनी ओर से जातक को अच्छा या बुरा फ़ल देता है, राहु की चाल से प्रत्येक १९ वीं साल में जातक के साथ अच्छा या बुरा फ़ल मिलता चला जाता है, अगर जातक की १९ वीं साल में किसी महिला या पुरुष से शारीरिक सम्बन्ध बने है, तो उसे ३८ वीं साल में भी बनाने पडेंगे, अगर जातक किसी प्रकार से १९ वीं साल में जेल या अस्पताल या अन्य बन्धन में रहा है, तो उसे ३८ वीं साल में, ५७ वीं साल में भी रहना पडेगा। राहु की गणना के साथ एक बात और आपको ध्यान में रखनी चाहिये कि जो तिथि आज है, वही तिथि आज के १९ वीं साल में होगी। . 7. राहु चन्द्र हमेशा चिन्ता का योग बनाते हैं राहु और चन्द्र किसी भी भाव में एक साथ जब विराजमान हो, तो हमेशा चिन्ता का योग बनाते है, राहु के साथ चन्द्र होने से दिमाग में किसी न किसी प्रकार की चिन्ता लगी रहती है, पुरुषों को बीमारी या काम काज की चिन्ता लगी रहती है, महिलाओं को अपनी सास या ससुराल खानदान के साथ बन्धन की चिन्ता लगी रहती है। राहु और चन्द्रमा का एक साथ रहना हमेशा से देखा गया है, कुन्डली में एक भाव के अन्दर दूरी चाहे २९ अंश तक क्यों न हो, वह फ़ल अपना जरूर देता है। इसलिये राहु जब भी गोचर से या जन्म कुन्डली की दशा से एक साथ होंगे तो जातक का चिन्ता का समय जरूर सामने होगा। . 8. पंचम का राहु औलाद और धन में धुंआ उडा देता है राहु का सम्बन्ध दूसरे और पांचवें स्थान पर होने पर जातक को सट्टा लाटरी और शेयर बाजार से धन कमाने का बहुत शौक होता है, राहु के साथ बुध हो तो वह सट्टा लाटरी कमेटी जुआ शेयर आदि की तरफ़ बहुत ही लगाव रखता है, अधिकतर मामलों में देखा गया है कि इस प्रकार का जातक निफ़्टी और आई.टी. वाले शेयर की तरफ़ अपना झुकाव रखता है। अगर इसी बीच में जातक का गोचर से बुध अस्त हो जाये तो वह उपरोक्त कारणों से लुट कर सडक पर आजाता है, और इसी कारण से जातक को दरिद्रता का जीवन जीना पडता है, उसके जितने भी सम्बन्धी होते है, वे भी उससे परेशान हो जाते है, और वह अगर किसी प्रकार से घर में प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो वे आशंकाओं से घिर जाते है। कुन्डली में राहु का चन्द्र शुक्र का योग अगर चौथे भाव में होता है तो जातक की माता को भी पता नही होता है कि वह औलाद किसकी है, पूरा जीवन माता को चैन नही होता है, और अपने तीखे स्वभाव के कारण वह अपनी पुत्र वधू और दामाद को कष्ट देने में ही अपना सब कुछ समझती है। . 9. सही भाव में राहु-गुरु चांडाल योग को हटाकर यान चालक बनाता है बुध अस्त में जन्मा जातक कभी भी राहु वाले खेल न खेले तो बहुत सुखी रहता है, राहु का सम्बन्ध मनोरंजन और सिनेमा से भी है, राहु वाहन का कारक भी है राहु को हवाई जहाज के काम, और अंतरिक्ष में जाने के कार्य भी पसंद है, अगर किसी प्रकार से राहु और गुरु का आपसी सम्बन्ध १२ भाव में सही तरीके से होता है, और केतु सही है, तो जातक को पायलेट की नौकरी करनी पडती है, लेकिन मंगल साथ नही है तो जातक बजाय पायलेट बनने के और जिन्दा आदमियों को दूर पहुंचाने के पंडिताई करने लगता है, और मरी हुयी आत्माओं को क्रिया कर्म का काम करने के बाद स्वर्ग में पहुंचाने का काम भी हो जाता है। इसलिये बुध अस्त वाले को लाटरी सट्टा जुआ शेयर आदि से दूर रहकर ही अपना जीवन मेहनत वाले कामों को करके बिताना ठीक रहता है। . 10. राहु के साथ मंगल व्यक्ति को आतंकवादी बना देता है राहु के साथ मंगल वाला व्यक्ति धमाके करने में माहिर होता है, उसे विस्फ़ोट करने और आतिशबाजी के कामों की महारता हाशिल होती है, वह किसी भी प्रकार बारूदी काम करने के बाद जनता को पलक झपकते ही ठिकाने लगा सकता है। राहु तेज हथियार के रूप में भी जाना जाता है, अगर कुन्डली में शनि मंगल राहु की युति है, तो बद मंगल के कारण राहु व्यक्ति को कसाई का रूप देता है, उसे मारने काटने में आनन्द महसूस होता है। . 11. राहु गुरु अपनी जाति को छुपाकर ऊंचा बनने की कोशिश करता है राहु के साथ जब गुरु या तो साथ हो या आगे पीछे हो तो वह अपनी शरारत करने से नहीं हिचकता है, जिस प्रकार से एक पल्लेदार टाइप व्यक्ति किसी को मारने से नही हिचकेगा, लेकिन एक पढा लिखा व्यक्ति किसी को मारने से पहले दस बार कानून और भलाई बुराई को सोचेगा। राहु के साथ शनि होने से राहु खराब हो जाता है, जिसके भी परिवार में इस प्रकार के जातक होते है वे शराब कबाव और भूत के भोजन में अपना विश्वास रखते है, और अपनी परिवारिक मर्यादा के साथ उनकी जमी जमाई औकात को बरबाद करने के लिये ही आते है, और बरबाद करने के बाद चले जाते है। इस राहु के कारण शुक्र अपनी मर्यादा को भूल कर अलावा जाति से अपना सम्बन्ध बना बैठता है, और शादी अन्य जाति में करने के बाद अपने कुल की मर्यादा को समाप्त कर देता है, शुक्र का रूप राहु के साथ चमक दमक से जुड जाता है। राहु के साथ शनि की महादशा या अन्तर्दशा चलती है तो सभी काम काज समाप्त हो जाते है। . 12 राहु के रोग राहु से ग्रस्त व्यक्ति पागल की तरह व्यवहार करता है पेट के रोग दिमागी रोग पागलपन खाजखुजली भूत चुडैल का शरीर में प्रवेश बिना बात के ही झूमना, नशे की आदत लगना, गलत स्त्रियों या पुरुषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना, लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, होरर शो देखने की आदत होना, भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना, नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरुषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना, कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाडते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फ़ेफ़डों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना, शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना, ड्र्ग लेने की आदत डाल लेना, नींद नही आना, शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना, गाली देने की आदत पड जाना, . . नोट:- हर जातक जातिका की कुंडली में ग्रहों की स्तिथि अलग अलग होती है इसलिए हर जातक किसी भी ग्रह की वजह से शुभ या अशुभ समय से गुजर रहा है तो उनके परडिक्षन या उपाय भी उनकी वर्तमान समस्या तथा कुंडली मे स्थित ग्रहों की स्तिथि के अनुसार ही किये जाये तो बेहतर परिणाम मिल पाते हैं। यही कारण है कि दुसरो की देखा देखी किये जाने वाले उपाय लाभ कि बजाय हानि ज्यादा करते हैं। हमेशा अपनी कुंडली के अनुसार ही उपाय या रत्न धारण किया करें।
Keywords
Subscribe for latest offers & updates
We hate spam too.
