
*बगलामुखी माँ (१० महाविद्या)* //////////////////...

*बगलामुखी माँ (१० महाविद्या)* ////////////////////////// ////////////////////////// वल्गामुखी - वल्गा का अर्थ है लगाम - मुखी का अर्थ मुख पर - पूर्ण अर्थ मुख अथवा जुबान पर लगाम लगाने की क्षमता वाली देवी भक्त्देव्शी भयंकरी माता वल्गामुखी . बगलामुखी - बागला के सामान केन्द्रित ध्यान एवं बागला को ही धारण करने की शक्ति इसका प्रतीक है . वल्गामुखी , वगलामुखी , बगलामुखी एवं पीताम्बरा प्रत्येक नाम के पूर्ण अर्थ हैं पीताम्बरा - माँ पीताम्बरा सृष्टि के रचना जिस अनु एयं ध्वनि से हुई उससे पूर्व पूर्ण रूप से यह सृष्टि कालमयी यही जिसे काली अर्थात काल के सब्स निकट का दर्जा दिया गया उसके पश्चात जो प्रथम किरण प्राप्ति हुई इस अंधकार में वह पीला पन के साथ प्राप्त हुई जिसने अम्बर में पीत वर्ण अथवा स्वर्णिम को दर्शाया जो पीताम्बरा एयं माता बगलामुखी नाम से सुशोभित हैं । इनका वर्चस्व एयं महिमा अपरंपार है इसके विषय मे शब्दो मे व्याख्या नही की जा सकती है , शब्द भाषा ध्वनि सब माता के अधीन हैं जिनके ही विभिन्न स्वरूप हैं । इसी की सत्यता को जानते हुए ऋषि मुनि ने पीला रंग धारण किया जिससे वह प्रथम प्राकृतिक ऊर्जा को ग्रहण कर सकें और अपनी शक्ति एयं ऊर्जा को उस परम ऊर्जा के साथ सम्मिलित कर सकें। दसमहाविद्या माता के 24 स्वरूप का वर्णन है जिसे 24 तत्व या 24 अवतार से भी जाना गया लेकिन उनमें से प्रचलित एयं सर्वाधिक सबके समक्ष 10 स्वरूप ही आए अन्य साधकों ने अन्य स्वरूप को गुप्त रखना ही उचित समझा जो कि अत्यंत गोपनीय ज्ञान है उसे वैसे ही रखना भी उचित है । 10 महाविद्या में समस्त स्वरूप माता बगलामुखी को दर्शाया गया , महा का अर्थ है अत्यधिक विद्या का अर्थ है अमृत अर्थात ज्ञान रूपी अमृत। ऐसे 10 प्रकार जिनके माध्यम से आप इस सृष्टि एयं प्रकृति के संबंध को समझ सकें और इनके बीच की दूरी को शून्य कर सकें । यह शून्य होते ही आपको महाविद्या की प्राप्ति होगी और यह एक ही देवी के अनेक स्वरूप है इसलिए आपको एक के दर्शन होने से समस्त के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं आपको सबकी अलग अलग साधना की आवश्यकता नही होती है। यह साधक के भाव के ऊपर निर्भर करता है कि वह माता के किस स्वरूप को धारण करने में समर्थ है और उसी के अनुसार वह उनके दर्शन की अभिलाषा रखता है। माता का यह स्वरूप सस्मत रूप से साधक की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करने में सामर्थ्य रखता है लेकिन लोभ , मोह , आदि से साधना का फल प्राप्त करना संभव नही है निश्चल मन से किया गया जप आपको संसार के भौतिक , शारीरिक, मानसिक समस्त सुख की प्राप्ति देने में सक्षम है।
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